मध्यप्रदेश में नर्सिंग फर्जीवाड़े को लेकर हाई कोर्ट ने गुरुवार को सख्त निर्देश जारी किए। कोर्ट ने नर्सिंग काउंसिल के चेयरमैन डॉ. जितेन शुक्ला और रजिस्ट्रार अनीता चांद को तत्काल पद से हटाने के आदेश दिए हैं। हाई कोर्ट ने साफ कहा कि जिन अधिकारियों पर गड़बड़ी के आरोप हैं, उन्हें काउंसिल के जिम्मेदार पदों पर बने रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती। मामले की गंभीरता को देखते हुए यह भी कहा गया कि ऐसे अधिकारी साक्ष्यों को प्रभावित कर सकते हैं। वहीं, कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया कि ऐसे अधिकारियों को हटाकर साफ छवि और अच्छे सर्विस रिकॉर्ड वाले अधिकारियों को मौका दें। लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल ने याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि 2021-22 में भोपाल के आरकेएस कॉलेज को अपात्र होने के बावजूद मान्यता दी गई। तत्कालीन इंस्पेक्टर अनीता चांद की इसमें भूमिका होने के आरोप हैं। शिकायत के बावजूद उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई, उल्टा उन्हें रजिस्ट्रार बना दिया गया। विशाल बघेल ने कोर्ट में बताया कि जिस डीएमई के चेयरमैन रहते फर्जीवाड़ा हुआ, उन्हें पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और फिर पुनः काउंसिल का चेयरमैन बना दिया गया। आरोपित अधिकारियों को हटाकर कोर्ट को बताएं
हाई कोर्ट की विशेष पीठ (जस्टिस संजय द्विवेदी और जस्टिस अचल कुमार पालीवाल) ने प्रिंसिपल सेक्रेटरी, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग और मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि इन अधिकारियों को तत्काल पद से हटाया जाए और इसकी सूचना 19 दिसंबर तक अदालत को दी जाए। 129 कॉलेजों की जांच हाई कोर्ट कमेटी को सौंपी गई
सीबीआई की दूसरी रिपोर्ट में गड़बड़ी पाए गए 129 नर्सिंग कॉलेजों की स्क्रूटिनी अब हाई कोर्ट की गठित कमेटी करेगी। पहले यह जिम्मेदारी नर्सिंग काउंसिल को दी गई थी, लेकिन अधिकारियों की संलिप्तता के चलते हाई कोर्ट ने अपने आदेश में संशोधन करते हुए यह फैसला लिया।


