मध्य प्रदेश में कड़ाके की ठंड ने यू-टर्न लिया है। आम तौर पर नवंबर के आखिरी सप्ताह कड़ाके की ठंड पड़ती है, लेकिन इस बार दिन में गर्मी है और रात में भी पारा 15 डिग्री से ज्यादा चल रहा है। ऐसा बर्फीली हवा प्रदेश में नहीं आने से हो रहा है। बुधवार-गुरुवार की रात में भी भोपाल, इंदौर-उज्जैन समेत 20 से ज्यादा शहरों में पारा 15 डिग्री से ज्यादा ही रहा। हालांकि, दो दिन बाद फिर से पारा लुढ़कने लगेगा। हालांकि, प्रदेश में सुबह के समय कोहरा छा रहा है। भोपाल में दिनभर धुंध का असर रहता है। सुबह के समय विजिबिलिटी 1 हजार मीटर तक रहती है। सीहोर में भी कोहरे का असर देखने को मिलता है। कोहरे की वजह से ही गुरुवार सुबह सीहोर में सड़क हादसा हो चुका है। नर्मदापुरम, रीवा समेत कई शहरों में कोहरा छा रहा है। 6 से 22 नवंबर तक कड़ाके की ठंड रही, अब राहत
बता दें कि प्रदेश में 6 नवंबर से ही कड़ाके की ठंड का दौर शुरू हो गया था। आम तौर पर नवंबर के दूसरे पखवाड़े से तेज ठंड पड़ती है, लेकिन इस बार पहाड़ी राज्य- हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में समय से पहले बर्फबारी हो गई। इस वजह से बर्फीली हवाओं से एमपी भी कांप उठा। भोपाल में लगातार 15 दिन तक शीतलहर चली। रिकॉर्ड के अनुसार, साल 1931 के बाद शीतलहर के यह सबसे ज्यादा दिन है। दूसरी ओर यहां रात का पारा 5.2 डिग्री तक पहुंच गया, जो ओवरऑल रिकॉर्ड भी रहा। इंदौर में नवंबर की सर्दी का 25 साल का रिकॉर्ड टूट गया। 22 नवंबर तक तेज ठंड का असर रहा, लेकिन इसके बाद शीतलहर से राहत मिली। ऐसा हवा का दिशा बदलना रहा। इस वजह से उत्तर से ठंडी हवा एमपी में नहीं आई और शीतलहर से राहत मिल गई, लेकिन आगे एक बार फिर कड़ाके की ठंड और शीतलहर का दौर शुरू होने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के ऊपर एक वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) एक्टिव है, जो अगले दो-तीन दिन के अंदर हिमालयीन क्षेत्र में पहुंच सकता है। इससे उत्तरी राज्यों में ठंड का असर बढ़ेगा और हवाओं की वजह से एमपी में भी ठिठुरन बढ़ जाएगी। भोपाल, इंदौर-उज्जैन में भी बढ़ा रात का पारा
बुधवार-गुरुवार की रात प्रदेश के शहरों में रात के तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिली। भोपाल में 15 डिग्री, इंदौर में 16.3 डिग्री, ग्वालियर में 10.3 डिग्री, उज्जैन में 17 डिग्री और जबलपुर में पारा 13.6 डिग्री रहा। रीवा, कल्याणपुर और नौगांव में पारा 10 डिग्री से नीचे ही रहा। दूसरी ओर, रतलाम, टीकमगढ़, सागर, गुना, खंडवा, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, धार, सिवनी, बैतूल, नर्मदापुरम समेत कई शहरों में पारा 15 से 18.8 डिग्री के बीच रहा। वहीं, गुरुवार को उज्जैन, खंडवा, खरगोन, धार, नर्मदापुरम, इंदौर, रतलाम, मंडला में पारा 29 डिग्री से ज्यादा दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार, पिछले एक सप्ताह में प्रदेश के अधिकांश शहरों में रात के तापमान में 8 डिग्री तक की बढ़ोतरी देखने को मिली है। सुबह कोहरा…इसलिए गाड़ी संभलकर चलाने की सलाह
प्रदेश में ठंड का असर भले ही कम हुआ हो, लेकिन सुबह व रात में कोहरा दा रहा है। इसलएि एक्सपर्ट ने लोगों को सुरक्षित ड्राइविंग करने की सलाह दी है। मौसम विभाग ने हेल्थ और फसलों को लेकर एडवाइजरी भी जारी की है। एमपी में ठंड से अब तक दो की मौत
कड़ाके की ठंड की वजह से पिछले दो दिन में दो लोगों की मौत भी हो चुकी है। रीवा के अमहिया थाना क्षेत्र स्थित अस्पताल चौराहा पर सड़क किनारे एक व्यक्ति की लाश पड़ी मिली थी। इससे पहले रायसेन में भी एक शख्स की मौत हो चुकी है। परिजनों का दावा है कि ठंड की वजह से ही मौत हुई, लेकिन प्रशासन ने ठंड से मौत होने की पुष्टि नहीं की है। जानिए, नवंबर में 5 बड़े शहरों का मौसम… भोपाल: इस बार टूट गया ओवरऑल रिकॉर्ड
नवंबर में भोपाल में रात का तापमान 9 से 12 डिग्री सेल्सियस पहुंच जाता है। पिछले 10 साल से ऐसा ही ट्रेंड रहा है। इस बार पहले सप्ताह से ही तेज ठंड का असर रहा। मौसम विभाग के अनुसार, भोपाल में नवंबर में रात का तापमान 6.1 डिग्री तक पहुंच चुका है। यह 30 नवंबर 1941 को दर्ज किया गया था, लेकिन इस साल 16 नवंबर की रात में पारा 5.2 डिग्री रहा। इस तरह नवंबर की सर्दी का ओवरऑल रिकॉर्ड बन गया है। यहां इस महीने बारिश होने का ट्रेंड भी है। 10 साल में तीन बार बारिश हो चुकी है। साल 1936 में महीने में साढ़े 5 इंच से ज्यादा पानी गिर चुका है। इंदौर: 5.6 डिग्री तक जा चुका न्यूनतम पारा
इंदौर में नवंबर में ठंड का असर रहता है। खासकर दूसरे सप्ताह से पारा तेजी से गिरता है। इस वजह से रातें ठंडी हो जाती हैं और टेम्प्रेचर 10 से 12 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। 25 नवंबर 1938 को पारा 5.6 डिग्री सेल्सियस तक जा चुका है। इंदौर में कभी-कभार बारिश भी हो जाती है। दिन में 31 से 33 डिग्री के बीच तापमान रहता है। ग्वालियर: 1927 में 3 इंच पानी गिरा था
पिछले 10 साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो नवंबर में ग्वालियर में पारा 8 डिग्री तक पहुंच चुका है। 54 साल पहले वर्ष 1970 में टेम्प्रेचर 3 डिग्री गया था। यह ओवरऑल रिकॉर्ड है। 2 नवंबर 2001 को दिन का तापमान 37.3 डिग्री तक रहा, जबकि यह सामान्य तौर पर 33 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। ग्वालियर में इस महीने बारिश भी होती है। 1927 में पूरे महीने 3 इंच से ज्यादा पानी गिरा था। 10 साल में 3 बार ऐसा ही मौसम रह चुका है। जबलपुर: 1946 में 6 इंच से ज्यादा बारिश
जबलपुर में पिछले 10 साल में 2022 में न्यूनतम पारा 7.8 डिग्री सेल्सियस तक जा चुका है। ओवरऑल रिकॉर्ड 12 नवंबर 1989 को दर्ज किया गया था, तब टेम्प्रेचर 3.9 डिग्री तक पहुंच गया था। 1946 में पूरे महीने 6 इंच से ज्यादा पानी गिरा था। 10 साल में दो बार बारिश हो चुकी है। दिन में 30 से 33 डिग्री सेल्सियस के बीच तापमान रहता है। उज्जैन: न्यूनतम तापमान 10-11° के बीच
उज्जैन में 30 नवंबर 1974 को रात का तापमान 2.8 डिग्री सेल्सियस पहुंच चुका है। यह ओवरऑल रिकॉर्ड है। वहीं, 6 नवंबर 2008 को दिन का तापमान 36.5 डिग्री रहा था। पिछले 10 साल की बात करें तो न्यूनतम तापमान 10-11 डिग्री के बीच रहा है, जबकि दिन में यह 33 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा है।


