इससाल की नवग्रह पंचकोशी यात्रा 26 दिसंबर को सुबह 6.30 बजे श्री नवग्रह मंदिर में पूजा अर्चना बाद “नर्मदे हर” के जयघोष के साथ शुरू होगी। इस यात्रा में 5 हजार से ज्यादा साधक शामिल होने वाले हैं। 2008 में ये यात्रा पहली बार हुई थी। ध्वज वाहक संतश्री नर्मदे हर बाबा मेहरजा की नेतृत्व में यात्रा का शहर भ्रमण के बाद नागझरी बोन्दरू बाबा मंदिर में पहला रात्रि विश्राम होगा। दूसरा विश्राम उमरखली, तीसरा कुंदा तट बडघाट, चौथा विश्राम पूर्णानंद बाबा तपोस्थली व समापन नवग्रह मंदिर परिसर होगा। केंद्रीय समिति अध्यक्ष शंकरलाल यादव, संरक्षक राधेश्याम शर्मा व प्रभारी राजेंद्र शर्मा, पंडित लोकेश जागीरदार, संतोष मारू ने प्रशासन से व्यवस्थाओं के संबंध में बात की। संस्थापक डॉ. भारती रहे हैं सीएम के गुरु
यात्रा से जुड़ी डॉ अनुराधा शर्मा ने बताया पंचकोशी यात्रा के संस्थापक डॉ. रवींद्र चौरे “भारती” उज्जैन विश्वविद्यालय में हिंदी के प्राध्यापक थे। वे मुख्यमंत्री मोहन यादव के माधव साइंस कॉलेज उज्जैन में गुरु रहे हैं। डॉ. रवींद्र पंचकोशी यात्रा के दौरान ही पूर्णेश्वर महादेव मंदिर, पुनासा में ब्रह्मलीन हुए थे। अभी केंद्रीय समिति 31 यात्राओं का संचालन कर रही है। खरगोन की नवग्रह पंचकोशी विशेष यात्रा है जो नवग्रह शांति, पूजन व परिक्रमा के उद्देश्य से 2008 में शुरू की गई थी। ये यात्रा नर्मदाजी के किसी भी तट से होकर नही गुजरती है।


