बेड़िया | जैन संतों का चातुर्मास के बाद अन्य तीर्थ क्षेत्र व प्रांतों के लिए विहार शुरू हो गया है। इसी कड़ी में नगर में मुनिश्री अक्षय सागर, मुनिश्री निराकुल सागर व क्षुल्लक श्री तत्वार्थ सागर महाराज का भीषण ठंड में सनावद की ओर से नगर में मंगल प्रवेश हुआ। मुनि अक्षय सागर महाराज ने प्रवचन माला में बताया जब तक आप ममत्व का त्याग नहीं करेंगे, जैन धर्म का पूर्ण रुप से पालन नहीं कर पाएंगे। मुनिश्री को आहार देने का सौभाग्य चेलना अतुल जैन परिवार को मिला। समाज सहसचिव तरंग जटाले व आदित्य धनोते ने बताया नववर्ष का आगाज हुआ व संतों का नगर आगमन होना सौभाग्य की बात है। जैन परंपरा में वर्षायोग का बड़ा ही महत्व है। सावन, भादौ, कुंवार व कार्तिक मास में होने वाले वर्षायोग को चातुर्मास कहते हैं।


