नहीं रहे नागौर के पूर्व सांसद भानु प्रकाश मिर्धा:अपने ही ‘काका’ को मात देकर रचा था इतिहास, टिकट कटा तो निर्दलीय ताल ठोकी​

नागौर के पूर्व सांसद भानु प्रकाश मिर्धा का लम्बी बीमारी के बाद आज उनके जोधपुर आवास पर निधन हो गया। स्वर्गीय मिर्धा 11वीं लोकसभा में उनके पिता और किसान केसरी नाथूराम मिर्धा के के देहांत के बाद हुए उपचुनाव में पहली बार भाजपा के सांसद बने थे। मिर्धा अपने पीछे भरा पुरा परिवार और राजनीतिक विरासत छोड़ गए हैं। उनका अंतिम संस्कार कल जोधपुर के चौपासनी रोड़ स्थित मिर्धा फार्म में किया जाएगा। इस परिवार के इतिहास में एक अध्याय ऐसा भी है, जिसने नागौर की सियासी जमीन को हमेशा के लिए बदल दिया। यह कहानी है पूर्व सांसद भानु प्रकाश मिर्धा की, जिन्होंने भारतीय जनता पार्टी के कमल के साथ दिल्ली की पंचायत में कदम रखा था। ​विरासत बनाम बगावत का चुनाव ​बात साल 1997 की है, जब किसान केसरी कहे जाने वाले नाथूराम मिर्धा के निधन के बाद नागौर लोकसभा सीट पर उपचुनाव हुए। कांग्रेस ने नाथूराम जी के भाई और कद्दावर नेता राम निवास मिर्धा को मैदान में उतारा। वहीं दूसरी ओर, नाथूराम मिर्धा के पुत्र भानु प्रकाश मिर्धा ने भाजपा का दामन थामकर चुनावी रण में उतरने का फैसला किया। ​यह मुकाबला केवल दो पार्टियों का नहीं, बल्कि ‘चाचा बनाम भतीजा’ का था। इस चुनाव में भानु प्रकाश मिर्धा ने अपने चाचा राम निवास मिर्धा को पराजित कर न केवल नागौर में भाजपा का परचम लहराया, बल्कि यह साबित कर दिया कि युवा नेतृत्व को जनता का भरपूर समर्थन प्राप्त है। हालांकि 2004 के लोकसभा चुनावों में पार्टी ने उनका टिकट काटा तो उन्होंने हवाई जहाज के निशान पर निर्दलीय चुनाव लड़ा था। ​सादा जीवन और दिल्ली तक का सफर ​27 मार्च 1953 को जन्मे भानु प्रकाश मिर्धा ने दिल्ली के रामजस कॉलेज से अपनी शिक्षा पूरी की। स्वभाव से सरल और खेती-किसानी से गहरा लगाव रखने वाले मिर्धा ने 11वीं लोकसभा के दौरान संसद में नागौर की आवाज बुलंद की। उन्होंने अपने कार्यकाल में पिछड़ों और किसानों के मुद्दों को प्राथमिकता दी। भानुप्रकाश मिर्धा ​पिता: स्व. नाथूराम मिर्धा (पूर्व केंद्रीय मंत्री) ​संसदीय कार्यकाल: 1997-1998 (11वीं लोकसभा) ​पार्टी: भारतीय जनता पार्टी (BJP) ​शिक्षा: बी.ए. (रामजस कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय) ​खेलों के प्रति रहा विशेष लगाव ​राजनीति के साथ-साथ भानु प्रकाश मिर्धा की पहचान एक खेल प्रेमी के रूप में भी रही है। कॉलेज के दिनों के बेहतरीन क्रिकेटर रहे मिर्धा ने हमेशा ग्रामीण क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया। ​आज भी नागौर की राजनीति में जब ‘मिर्धा परिवार’ के प्रभाव और भाजपा के उदय की चर्चा होती है, तो भानु प्रकाश मिर्धा का वह उपचुनाव वाला दौर एक मिसाल के रूप में याद किया जाता है।

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