नागौर नगर परिषद की ओर से शहर के बालवा रोड पर बहुप्रतीक्षित अहिछत्रपुर आवासीय योजना पर लगे स्टे को जोधपुर हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। मामले की सुनवाई के दौरान योजना से जुड़ी पत्रावली का अवलोकन करने पर हाईकोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता ने न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग कर याचिका दायर की है। हाईकोर्ट की खंडपीठ के जज ने आवासीय कॉलोनी के आवंटन से जुड़ी दोनों याचिकाएं खारिज कर दी हैं। नगर परिषद की ओर से सीनियर एडवोकेट डॉ. सचिन आचार्य व एडवोकेट चयन बोथरा ने पक्ष रखते हुए कोर्ट को बताया कि एक याचिकाकर्ता ने पहले भी समान तथ्यों और कानूनी आधारों पर याचिका दायर की थी, जिसे न्यायालय खारिज कर चुका था। इसी क्रम में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि पूर्व याचिकाकर्ता सत्यनारायण की शह पर बाबूलाल ने भी समान तथ्यों के आधार पर एकल पीठ के समक्ष याचिका दायर की थी। हाइकोर्ट से स्टे खारिज होने के फैसले की प्रति आने के बाद नगर परिषद समेत परिवादी पक्ष ने राहत की सांस ली है। बता दें कि यह मामला करीब 3 साल से अटका हुआ था। नगर परिषद की बजट घोषणा में भी इस मुद्दे को उठाया गया था। एक हजार लोगों को मिल सकेगा आवास
अहिछत्रपुर आवासीय योजना से स्टे हटने से करीब 1 हजार लोगों का अपने घर का सपना पूरा हो सकेगा। नगर परिषद लोगों को भूखंड आवंटन कर सकेगी। इससे नगर परिषद की राजस्व आय में भी इजाफा होगा। प्रस्तावित 150 बीघा भूमि में आवासीय भूखंड काटे जाएंगे। इसमें 20 फीसदी भूखंडों की नीलामी होगी। नीलामी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आवासीय योजना में लॉटरी से भूखंडों का आवंटन किया जाएगा। नगर परिषद इस कॉलोनी में बिजली, पानी, सीवरेज, सड़क आदि सुविधाएं देगी। हाईकोर्ट ने स्टे हटाने के बाद नगर परिषद को कॉलोनी विकसित करने के लिए सड़कें, पार्क व धार्मिक स्थल निर्माण के साथ ही विभिन्न श्रेणियों में इन भूखंडों की लॉटरी प्रक्रिया शुरू करने के दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। अजमेर नगर नियोजक ने दी थी योजना को स्वीकृति
8 मार्च 2019 में तत्कालीन जिला कलेक्टर ने नगर परिषद को वर्तमान खसरा नंबर 1762/73 की 150 बीघा भूमि का हस्तांतरण किया था। नगर परिषद ने 40 गुना पूंजीगत राशि देकर यह जमीन प्राप्त करने की प्रक्रिया पूरी की। इसके बाद वर्ष 2020 में तत्कालीन सभापति कृपाराम सोलंकी के कार्यकाल में अहिछत्रपुर आवासीय कॉलोनी योजना का प्रारूप बनाकर नगर परिषद ने नगर नियोजक अजमेर को भेजा था। अजमेर नगर नियोजक ने योजना को स्वीकृति दी गई। इस दौरान वर्ष 2021 में नागौर के बाकल माता मंदिर क्षेत्र निवासी सत्यनारायण ने जोधपुर हाइकोर्ट में पीआईएल दायर की। उसमें बताया कि गोचर जमीन का आवासीय योजना में इस्तेमाल सुसंगत नहीं है। गोचर जमीन लेने पर उतनी ही जमीन गोचर में देनी पड़ती है। इस संबंध में नगर परिषद ने हाइकोर्ट में तर्क रखा कि याचिका में रखे गए तथ्य पंचायतीराज एक्ट नगरीय सीमा में लागू नहीं किए जा सकते। साथ ही इसी खसरे में केंद्रीय, स्कूल व हाउसिंग बोर्ड आदि के निर्माण का हवाला दिया। नगरपालिका सीमा में स्थित भूमि या हस्तांतरण भूमि की किस्म को चारागाह नहीं कहा जा सकता। नगर पालिका सीमा में चारागाह भूमि रखने की कोई आवश्यकता नहीं है। इस पर कोर्ट ने पीआईएल खारिज कर दी। दोबारा लगाई गई याचिका की सुनवाई में स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट करते हुए हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी भी की। शहर के विकास को मिलेगी गति
सभापति मीतू बोथरा ने कहा- अहिछत्रपुर कॉलोनी पिछले 25 वर्षों से लंबित थी। हाईकोर्ट से स्टे हटने के निर्णय का जोरदार स्वागत किया है। ये बहुत अच्छा अवसर है, जिससे नागौर शहर का विकास होगा। कॉलोनी में 20 प्रतिशत भूखंड नीलामी प्रक्रिया और 80 प्रतिशत भूखंड लॉटरी प्रक्रिया के जरिए आवंटित होंगे। इस कॉलोनी में बिजली, पानी, सड़क और सीवरेज की सुविधाएं विकसित की जाएंगी। नागौर की बढ़ती आबादी को देखते हुए ये जनहित में बड़ा फैसला है, क्योंकि सभी सरकारी महत्त्वपूर्ण कार्यालय भी उधर ही विकसित होंगे। हाईकोर्ट की ओर से अहिछत्रपुर आवासीय कॉलोनी विकसित करने पर लगी रोक हटाने से शहर के विकास कार्यों को गति मिलेगी। इस संबंध में प्रक्रिया शुरू करने के लिए नगर परिषद आयुक्त को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा चुके हैं। नगर परिषद आयुक्त रामरतन चौधरी ने कहा कि अहिछत्रपुर कॉलोनी पर लगा स्टे खारिज हो गया है। अहिछत्रपुर आवासीय योजना विकसित करने के लिए जल्द ही आवश्यक प्रक्रियाएं शुरू की जाएंगी।


