राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष को लेकर नागौर में खास तैयारियां की जा रही है। 2016 में नागौर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रतिनिधि सभा में ही सरसंघ चालक मोहन भागवत ने संघ गणवेश में परिवर्तन किया था। जिसके तहत गणवेश में नेकर की जगह पेंट को जोड़ा गया था। इस बार 12 जनवरी को नागौर में द्विधारा पथ संचलन का आयोजन किया जा रहा है। गौरतलब है कि आरएसएस में मकर संक्रांति का पर्व विशेष रूप से मनाया जाता है। इसके चलते नागौर में मकर संक्रांति से 2 दिन पहले विशेष आयोजन किए जा रहे हैं। जिला सहकार्यवाह मनीष शर्मा ने बताया कि विशेष पथ संचलन कार्यक्रम 12 जनवरी को दोपहर साढ़े 12 बजे से शुरू होगा। जिला मुख्यालय स्थित सेठ किशनलाल कांकरिया स्कूल के खेल मैदान में दोपहर 12 बजे शारीरिक प्रदर्शन के साथ कार्यक्रम शुरू होगा। इस दौरान दंड दर्शन, नियुद्ध यानि बिना शस्त्र रक्षा करना, आसन, योग, आसन, गीत और तिष्ठ योग का प्रदर्शन होगा। इसके बाद मंच पर संघ के राजस्थान क्षेत्र कार्यवाह जसवंत खत्री, रिटायर्ड एयरमार्शल जगदीश चंद्र और जैसला पीठ के रामाचार्य महाराज संबोधित करेंगे। मंच पर वक्ताओं के संबोधन के बाद कांकरिया स्कूल से 2 दलों में पथ संचलन के लिए स्वयंसेवक रवाना होंगे। इसमें एक दल को शक्ति धारा और दूसरी को भक्ति धारा नाम दिया गया है। शक्ति धारा का संचलन रेलवे स्टेशन, नकास गेट, रामपोल, शिवबाड़ी, किले की ढाल होकर निकलेगा। वहीं दूसरी ओर भक्ति धारा का संचालन अहिंसा सर्किल, नया दरवाजा, लोहियों का चौक, काठड़ियों का चौक और त्रिपोलिया होकर निकलेगा। ठीक शाम 3 बजकर 33 मिनट पर गांधी चौक में दोनों दलों का मिलन होगा। इसके बाद दोनों दल एक होकर दिल्ली दरवाजा और विजय वल्लभ चौक होकर माली समाज भवन पहुंचेंगे। माली समाज भवन में भारतीय संगीत और वाद्य यंत्रों की धुन पर घोष वादन के साथ कार्यक्रम समापन होगा। द्विधारा पथ संचलन को लेकर स्वयंसेवक जोर-शोर से तैयारियों में जुटे हुए हैं। पथ संचलन के लिए नियमित अभ्यास व संपर्क अभियान का अंतिम चरण खत्म हो गया। संपर्क अभियान के तहत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद नागौर शाखा ने अधिकतम संख्या में शामिल होने का निवेदन किया है।


