शाजापुर में एक नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) ने आरोपी सचिन मीणा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला नए कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत बुधवार शाम को सुनाया गया है। आरोपी सचिन पिता घनश्याम मीणा (35 वर्ष), निवासी ग्राम बेहरावल, थाना कालापीपल, को एट्रोसिटी एक्ट की धारा 3(2)(5) के तहत आजीवन कारावास और 500 रुपए अर्थदंड से दंडित किया गया। इसके अतिरिक्त, बीएनएस की धारा 65(1) में बीस वर्ष का कठोर कारावास, धारा 332(बी) में दस वर्ष का कठोर कारावास और धारा 351(3) में सात वर्ष का कठोर कारावास, प्रत्येक के साथ 500 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। क्या है मामला जिला मीडिया सेल प्रभारी प्रतीक श्रीवास्तव, सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी, शाजापुर ने बताया कि यह घटना 2 अप्रैल 2025 को हुई थी। पीड़िता (14 वर्ष) ने अपनी मां के साथ थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि दोपहर करीब 2 बजे जब उसके माता-पिता मजदूरी करने जंगल गए थे, तब वह घर में अकेली थी। इसी दौरान आरोपी सचिन मीणा जबरदस्ती उसके घर में घुस आया और उसके साथ दुष्कर्म किया। जब पीड़िता ने शोर मचाया, तो आरोपी ने उसे जातिसूचक गालियां देते हुए जान से मारने की धमकी दी, कहा कि अगर उसने चिल्लाया तो उसे और उसके परिवार को खत्म कर देगा।पुलिस ने पीड़िता की रिपोर्ट पर अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की। विवेचना के दौरान पीड़िता और गवाहों के बयान दर्ज किए गए। आरोपी और पीड़िता के डीएनए परीक्षण के लिए नमूने एकत्र कर क्षेत्रीय न्यायालय विज्ञान प्रयोगशाला, भोपाल भेजे गए। पुलिस ने पूरी विवेचना के बाद न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया। 14 गवाहों ने दिए बयान विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 14 गवाहों के बयान माननीय न्यायालय के समक्ष दर्ज कराए गए।साक्ष्य के दौरान डीएनए जांच रिपोर्ट भी सकारात्मक प्राप्त हुई।न्यायालय ने गवाहों के बयानों और डीएनए जांच रिपोर्ट पर विश्वास करते हुए आरोपी के खिलाफ आरोप प्रमाणित पाए और दोषसिद्धि का निर्णय सुनाया।न्यायालय ने इस गंभीर अपराध को देखते हुए आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।पीड़िता एक नाबालिग और अनुसूचित जनजाति की लड़की है, जिसके घर में घुसकर आरोपी ने जबरदस्ती दुष्कर्म किया था। न्यायालय ने पीडिता प्रतिकर योजना के अंतर्गत पीडिता को अपराध के परिणामस्वरूप हुई हानिक्षति व पुनर्वास के लिए पृथक से तीन लाख रूपये अदा करने की सिफारिश सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण शाजापुर को की गई। प्रकरण में शासन की ओर से पैरवी रमेश सोलंकी अतिरिक्त जिला लोक अभियोजन अधिकारी जिला शाजापुर द्वारा की गई।न्यायालय ने अभियोजन के द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य एवं तर्कों से सहमत होते हुये आरोपी के विरूद्ध दोषसिद्धि का निर्णय पारित किया।


