नामकुम के जोरार पुल पर पीछा कर पुलिस ने पकड़ा:व्यवसायी की रेकी करने जा रहे राहुल दुबे गिरोह के दो अपराधी गिरफ्तार

नामकुम में जोरार पुल के पास शुक्रवार रात पुलिस ने राहुल दुबे गिरोह के दो अपराधियों राजेश पांडे उर्फ अमरजीत और कन्हाई दास को गिरफ्तार किया है। मूल रूप से सोनाहातु निवासी अमरजीत फिलहाल नामकुम के जोरार बस्ती में रहता है। उससे एक पिस्टल, दो मैग्जीन और पांच गोलियां बरामद हुई है। वहीं सोनाहातु निवासी कन्हाई से भी एक पिस्टल, दो मैग्जीन और पांच गोलियां मिलीं हैं। शुक्रवार रात जोरार पुल के पास पुलिस जांच अभियान चला रही थी। तभी ओरमांझी की ओर से बाइक से रांची आ रहे अमरजीत और कन्हाई ने लाइट बंद कर दी। ताकि पुलिस न देख पाए। लेकिन लाइट बंद करने से पुलिस को शक हो गया। इसी दौरान दोनों ने भागने की कोशिश की। पुलिस ने पीछा किया और दोनों को पकड़ लिया। तलाशी में दोनों से हथियार और गोलियां मिलीं। अमरजीत ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि रामगढ़ के एक कोयला व्यवसायी पर फायरिंग करने के लिए हरियाणा के एक शूटर गगन यादव उर्फ जाटजी को रांची बुलाया गया था। लेकिन सुपारी के पैसे पर बात नहीं बनी तो वह वापस चला गया। इसके बाद अमरजीत और कन्हाई को व्यवसायी की रेकी करने के लिए रांची भेजा था। इसी दौरान वे पकड़े गए। राहुल दुबे और राहुल सिंह गिरोह में फूट, अब ये एक-दूसरे की पुलिस से कर रहे हैं मुखबिरी गैंगस्टर अमन साहू के मारे जाने के बाद मयंक सिंह मीणा गिरोह की कमान संभाल रहा था। पुलिस उसे 23 अगस्त को अजरबैजान से प्रत्यर्पण कर रांची लाई और जेल भेज दिया। इसके बाद मलेशिया में बैठे राहुल सिंह ने सोशल मीडिया पर खुद को गिरोह का सरगना घोषित कर दिया। रंगदारी वसूलने लगा। उधर, मयंक सिंह ने सोशल मीडिया पर राहुल दुबे को सरगना घोषित किया। मयंक ने व्यवसायियों से अपील की कि वे राहुल सिंह को रंगदारी न दें। तभी से राहुल दुबे और राहुल सिंह गिरोह में फूट पड़ गई। अब दोनों गिरोह पुलिस से एक-दूसरे की मुखबिरी कर रहा है। इससे दोनों गिरोह के अपराधी पकड़े जा रहे हैं। दो माह में दोनों गिरोह के 14 गुर्गे पकड़े गए जेल में बंद मयंक ने दिलवाया था हथियार दोनों अपराधियों ने पूछताछ में बताया कि जेल में बंद अपराधी मयंक सिंह मीणा के इशारे पर उन्हें हथियार मिला था। इसके अलावा सरगना राहुल दुबे उर्फ जयशंकर दुबे और तुषार मिश्रा उर्फ सौम्या उन्हें गाइड कर रही था। यही तीनों उन्हें व्यवसायियों के नाम उपलब्ध कराते थे और फिर वे लोग रेकी करते थे। फिर अन्य सदस्य उससे रंगदारी मांगते थे। रांची और रामगढ़ के कई व्यवसायी इस गिरोह के निशाने पर थे, जिनसे रंगदारी वसूलनी थी।

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