नारनाडी में हिंगलाज माता के प्रति अटूट आस्था है। यहां बना माता का मंदिर 350 साल से भी ज्यादा पुराना है। मां के प्रति आस्था के चलते आज भी गांव में कोई भी व्यक्ति मंदिर से ऊंचा यानी दो मंजिला मकान नहीं बनाता है। किंवदंती है कि देव पुरी महाराज ने अनेक सिद्धि और तपस्या की तो उन्हें देवी का वरदान मिला। वे मां हिंगलाज के दर्शन करने पाकिस्तान के बलूच जाया करते थे। उनकी इस आस्था से खुश होकर 350 साल पहले मां हिंगलाज उनके सामने प्रकट हुईं। ग्रामीण यहां पूजा-अर्चना और दर्शन करने पहुंचते हैं। नारनाडी गांव के श्रद्धालु पोलाराम पटेल ने बताया कि पीढ़ियों से सुनते आ रहे हैं कि देव पुरी महाराज को मां का वरदान प्राप्त है। 1888 में ही मां की प्रतिमा प्रकट हुई थी और गांव वालों को भी दर्शन दिए थे। तब शेर भी घूमता था गांव में, तो संत कहते थे कि डरो मत देवी है। गांव में अन्य जातियों सहित नागा साधु भी यहां कभी प्रवेश नहीं करते थे। कुछ लोग यहां रात में नहीं रुकते हैं। यहां मकान भी एक मंजिल से ऊपर तक नहीं हैं। माना जाता है कि मंदिर से अधिक ऊंचाई यानी दो-तीन मंजिल के मकान बनाएंगे तो अनहोनी हो जाएगी। ऐसा हुआ भी है। यहां फैक्ट्री व कॉलेज के भवन अधिक मंजिल तक बने तो वे फट गए और अनहोनी भी हुई।


