राजस्थान के पावर सेक्टर को बूस्टर डोज मिलने वाला है। सरकार विद्युत तंत्र मजबूत करने पर 23 हजार करोड़ खर्च करेगी। राज्य में आजादी के बाद से ही 765 केवी क्षमता के हाउस हैं। यह फागी और बारां के अंता में हैं। इन पर पूरे राज्य का विद्युत भार है। लेकिन 765 केवी के 9 और 400 केवी के 10 पावर हाउस बनाए जाएंगे। यह पावर हाउस अंता-2, हिंडौन, अजरका, बीकानेर, बाबई, कांकाणी, भादला, नागौर और जैसलमेर में बनेंगे। इससे राज्य में बिजली की छीजत घटेगी। पावर वोल्टेज में सुधार होगा, साथ ही कट कम हो सकेगा। रिन्युएबल एनर्जी का उपयोग पहले राजस्थान में होगा राजस्थान में सोलर और विंड पावर के जरिए बड़ी मात्रा में रिन्युएबल एनर्जी का उत्पादन हो रहा है। बड़ी संख्या में प्लांट लगाए गए हैं। इनसे उत्पादित रिन्युएबल एनर्जी का उपयोग पहले राजस्थान में हो इसलिए नए पावर हाउस और लाइनों का निर्माण बेहद जरूरी है। राजस्थान में रिन्युएबल एनर्जी के रूप में 32 हजार मेगावाट का बिजली का उत्पादन हो रहा है। भीलवाड़ा,बीकानेर,जोधपुर, बाड़मेर,जैसलमेर, चित्तौड़ रिन्युएबल एनर्जी के गढ़ बन गए है। राजस्थान में इसके लिए 2032 तक की प्लानिंग की जा रही है। सिंचाई के लिए दिन में बिजली 19 जिलों में सिंचाई के लिए दिन में बिजली नहीं मिल रही है। नए पावर हाउस और बिजली तंत्र मजबूत होने पर सभी जिलो के किसानों को 2027 में दिन में बिजली मिलने का रास्ता साफ होगा। एमडी ने कहा- प्रस्ताव काे मंजूरी मिली
“विद्युत तंत्र मजबूत करने के लिए प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। 23 हजार करोड़ खर्च हाेंगे। 765 और 400 केवी के नए पावर हाउस बनेंगे।”
-सिद्धार्थ सियाग, एमडी, RRPVN


