भोपाल में नाली का पानी भी पीने लायक है। ये हम नहीं कह रहे, बल्कि नगर निगम के अमले ने जल सुनवाई के दौरान वाटर टेस्टिंग के बाद इसे माना है। जी हां, नाली के पानी को वार्ड ऑफिस में महज 15 सेकंड में हुए टेस्ट में ‘शुद्ध’ बता दिया गया। इससे समझा जा सकता है कि भोपाल के किसी भी वार्ड में इंदौर के भागीरथपुरा जैसे हालात कभी भी बन सकते हैं। दैनिक भास्कर ने मंगलवार को जल सुनवाई में ये रियलिटी चेक किया। इसके लिए भोपाल के 6 वार्ड दफ्तरों में भास्कर रिपोटर्स पहुंचे। देखा कि पानी की शुद्धता जांचने के क्या पैमाने हैं और इसे जांच कौन रहा है? सभी जगह पर तस्वीर गंभीर दिखी। टाइम कीपर और प्यून पानी की टेस्टिंग करते मिले। यही वजह है कि नाली के गंदे पानी को भी क्लीन चिट दे दी गई।
जानिए, जल सुनवाई की जरूरत क्यों पड़ी? इंदौर के भागीरथपुरा में बीते दिनों दूषित पानी पीने से 28 लोगों की मौत हो चुकी है। मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हर मंगलवार को प्रदेशभर में जल सुनवाई के आदेश दिए हैं। इसमें पेयजल के रंग, स्वाद, क्लोरीन, टीडीएस जैसी 11 जांचें की जा रही हैं। भोपाल के 85 वार्डों में भी हर सप्ताह 2 घंटे जल सुनवाई हो रही है। गंदे पानी की जांच, गड़बड़ी और हालात वार्ड 70 में सिर्फ क्लोरीन का टेस्ट कर कहा- पानी पीने लायक है
भोपाल में पंजाबी बाग स्थित वार्ड 70 का निगम दफ्तर। यहां पानी की शुद्धता की जांच का जिम्मा कर्मचारी संजय नावले पर है। भास्कर रिपोर्टर ने दोपहर 12 बजे बोतल में भरकर उस पानी की टेस्टिंग करवाई, जो निगम दफ्तर के सामने से गुजरी नाली का ही है। दफ्तर के अंदर संजय ने जल गुणवत्ता फील्ड टेस्ट किट निकाली, लेकिन टेस्ट सिर्फ क्लोरीन का किया। 10 एमएल पानी में क्लोरीन जांचने के केमिकल की दो बूंदें डाली गईं। लगभग 15 सेकंड में जांच पूरी हो गई और संजय ने गंदे पानी को क्लीन चिट दे दी। कहा कि यह पानी पीने लायक है, जबकि पानी से बदबू भी आ रही थी। हैरानी की बात ये है कि दो अन्य वार्ड कार्यालयों में भी पानी की शुद्धता की जांच कराई तो वहां भी सिर्फ क्लोरन की ही जांच की गई। वार्ड 44 में टाइम कीपर को जांच का जिम्मा, बोला- दो ही शिकायत आईं
यही हाल सुभाष नगर वार्ड में है। यहां टाइम कीपर वरुण विजयवर्गीय, श्रमिक लक्ष्मीनारायण पानी की शुद्धता की जांच करते हुए नजर आए। स्थानीय रहवासी अब्दुल हसीम गंदे पानी की शिकायत लेकर पहुंचे थे। हसीम ने कहा कि पानी में बहुत बदबू आती है। मटमैला भी है। शिकायत की, लेकिन पानी साफ नहीं आया। दूषित पानी की वजह से पूरा परिवार बीमार है। वरुण और लक्ष्मीनारायण ने हसीम द्वारा लाए गए पानी में क्लोरीन की जांच की और उसे पीने लायक बता दिया। हसीम ने कहा- पानी में से बदबू भी आ रही है, लेकिन जांच सिर्फ क्लोरीन को लेकर ही की गई? इस पर कर्मचारी वरुण ने बताया कि यहां क्लोरीन की जांच ही करते हैं। पानी ज्यादा गंदा है तो उसे लैब में टेस्ट के लिए भेजते हैं। उन्होंने बताया कि आज दो ही शिकायत आईं। इनके सैंपल लिए हैं। वार्ड 60 में कहा- मुझे मालूम नहीं होता तो नाली का पानी पी लेता
अवधपुरी स्थित वार्ड 60 में सुपरवाइजर अजय पटेल और वाटरमैन राजकुमार पानी की शुद्धता जांचने का काम कर रहे थे। भास्कर रिपोटर्स ने पंजाबी बाग से बोतल में भरे नाली के पानी की जांच कराई। अजय और राजकुमार ने पानी को क्लीन चिट दे दी। जब दोनों को बताया कि ये नाली का पानी है तो उनके होश उड़ गए। भास्कर टीम ने उन्हें हकीकत बताते हुए कहा कि ये पानी शुद्ध है तो पीकर बताएं? यह सुनकर दोनों ही ना-नुकुर करने लगे। फिर कहा कि मुझे नाली का मालूम नहीं होता तो पानी पी लेता। भोपाल में गंदे पानी की लगातार शिकायतें, पर सुनवाई नहीं
मंगलवार को भास्कर ने जिन 5 वार्डों में जाकर रियलिटी चेक किया, उनमें पिछले दो सप्ताह में 10 शिकायतें भी नहीं आईं। कई लोग आए, जरूर लेकिन उन्हें क्लोरीन की जांच करके संतुष्ट कर दिया गया, जबकि यह पानी पीने लायक नहीं था। मंगलवार को अयोध्या एक्सटेंशन के कई लोग वार्ड 68 के दफ्तर में शिकायत लेकर पहुंचे। कहा कि वार्ड में पानी की पाइप लाइन, सीवेज में से गुजर रही है। कई बार शिकायत करने के बाद भी साफ पानी नहीं मिल रहा है। ऐसे में दूषित पानी पी रहे हैं। सप्लाई की टंकी भी करीब डेढ़ साल से साफ नहीं हुई है। प्रेम नगर में पानी इतना गंदा है कि कांच की बोतल के आर-पार देखना मुश्किल है। भेल और करोंद इलाके में भी गंदे पानी की समस्या है। 11 टेस्ट करने के आदेश, पर हो नहीं रहे
मुख्यमंत्री के आदेश के बाद जल सुनवाई में 11 जनरल टेस्ट और 3 अन्य पैरामीटर पर जांच करने को कहा गया है। बकायदा आदेश निकाले गए हैं। इन 11 जांचों में रंग, स्वाद, पीएच, हार्डनेस, कैल्शियम हार्डनेस, मैग्नीशियम हार्डनेस, टीडीएस आदि शामिल हैं। वहीं, अन्य 3 पैरामीटर में ई-कोलाई जैसे बैक्टीरिया की जांच भी शामिल हैं। टाइम कीपर, प्यून, सुपरवाइजर को दिया जिम्मा
एक्सपर्ट की मानें तो पीने के पानी की जांच प्रशिक्षित व्यक्ति ही कर सकता है, जिसे इसकी गुणवत्ता और केमिकल की मात्रा की सही जानकारी हो, लेकिन इस काम में टाइम कीपर, प्यून और सुपरवाइर को भी लगा दिया गया है। डेली वैजेज कर्मचारियों से भी काम करवाया जा रहा है। यह मामला सीधे जनता की सेहत से जुड़ा है। पानी की जांच के लिए केमिस्ट या कम से कम लैब असिस्टेंट की तैनाती जरूरी है। जांच उसकी निगरानी में नहीं, बल्कि उसके द्वारा होनी चाहिए। ये खबर भी पढ़ें…. दूषित पानी से कांग्रेस के वार्ड अध्यक्ष की मौत, इंदौर में मृतकों का आंकड़ा 28 पर पहुंचा इंदौर में दूषित पानी से 28वीं मौत हुई है। भागीरथपुरा निवासी रिटायर्ड शिक्षक राजाराम बौरासी (75) ने रविवार को इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। बौरासी कांग्रेस के वार्ड अध्यक्ष भी थे। परिजन ने बताया कि राजाराम बौरासी को शुक्रवार को उल्टी-दस्त की शिकायत हुई थी। पढ़ें पूरी खबर…


