पिछड़ा वर्ग आयोग की अनुशंसा पर राज्य के 48 नगर निकायों में से 24 आरक्षित हो सकते हैं। आयोग द्वारा नगर विकास विभाग को सौंपी ट्रिपल टेस्ट की रिपोर्ट के आधार पर विभाग यह प्रस्ताव बना रहा है, जिसे स्वीकृति के लिए कैबिनेट को भेजा जाएगा। निकायों के आरक्षण पर निर्णय नगर विकास विभाग करेगा, जबकि निकायों में वार्डों के आरक्षण पर फैसला राज्य निर्वाचन आयोग करेगा। आयोग की अनुशंसा के मुताबिक 50% आरक्षण सीमा के अंदर ही शहरी निकाय निर्वाचन क्षेत्र में आरक्षण का प्रावधान होगा। इसके लिए वार्ड स्तर पर समेकित रिपोर्ट तैयार की गई है। पिछड़ा वर्ग आयोग के ट्रिपल टेस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, निकाय क्षेत्रों में सामान्य वर्ग के वोटर 34.82%, बीसी वन 31.36%, बीसी टू 14.34%, एससी 11.24% व एसटी के 8.24% हैं। शहरी निकाय में ओबीसी पहले, सामान्य दूसरे और एससी तीसरे नंबर पर हैं। बड़ा सवाल… राज्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति आखिर कब तक करेगी सरकार पिछड़ा वर्ग आयोग ने अनुशंसा कर अपनी भूमिका पूरी कर ली: केके सिंह पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य सचिव केके सिंह ने बताया कि आयोग ने अनुशंसा सौंपकर अपनी भूमिका पूरी कर ली है। ट्रिपल टेस्ट की रिपोर्ट देने के बाद अब आगे राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को निर्णय लेना है। हाईकोर्ट के आदेश और पिछड़ा वर्ग की अनुशंसा के बाद निकाय चुनाव को लेकर सक्रियता बढ़ी है। पर, बड़ा सवाल यह है कि राज्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति आखिर कब तक होगी। निर्वाचन आयोग ही वार्डों के परिसीमन या आरक्षण पर निर्णय लेगा। चुनाव की तैयारी आयोग के निर्देशन में होगी। ऐसे में बगैर राज्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति के चुनाव संभव नहीं है।


