झारखंड में लगभग डेढ़ साल से अधिक समय से नगर निकाय चुनाव नहीं हुए हैं। नगर प्रशासकों के माध्यम से इनका संचालन किया जा रहा है। चुनाव नहीं कराने को लेकर हाईकोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई भी जारी है। हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा इसे अवमानना का मामला बताया। कहा कि राज्य सरकार नगर निकायों में ओबीसी आरक्षण के लिए ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया के नाम पर चुनाव नहीं रोक सकती। नगर निकाय चुनाव में हो रही देर और हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने सीएम हेमंत पर सीधी टिप्पणी की है। उन्होंने अपने X अकाउंट पर लिखा है कि नगर निकाय चुनावों के प्रति उदासीनता और माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों की अवहेलना कर हेमंत सरकार जनता की लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों का हनन कर रही है। राज्य निर्वाचन आयोग ने भी माननीय न्यायालय को अवगत कराया है कि हेमंत सरकार आवश्यक सहयोग प्रदान नहीं कर रही है। नगर निकाय चुनावों को टालकर हेमंत सरकार प्रशासकों के माध्यम से इनके संचालन का काम कर रही है। इन प्रशासकों के संरक्षण में नगर निकायों में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का बोलबाला बढ़ रहा है। बिना निर्वाचित प्रतिनिधित्व के, नागरिक हितों की अनदेखी कर हेमंत सरकार बड़े घोटाले को अंजाम दे रही है। हाईकोर्ट का आदेश- 16 जनवरी को मुख्य सचिव हों उपस्थित नगर निकायों के चुनाव में हो रही देरी पर सुनवाई करते हुए झारखंड हाईकोर्ट के न्यायधीश जस्टिस जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने इसे अवमानना का मामला बताया। कहा कि राज्य सरकार नगर निकायों में ओबीसी आरक्षण के लिए ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया के नाम पर चुनाव नहीं रोक सकती।
सुनवाई के दौरान राज्य निर्वाचन आयोग के अधिवक्ता ने बताया कि भारत के निर्वाचन आयोग ने आग्रह के बावजूद नया वोटर लिस्ट अब तक उपलब्ध नहीं कराया है। राज्य सरकार भी इसमें सहयोग नहीं कर रही है। इस पर कोर्ट ने निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया। इसके बाद अदालत ने मुख्य सचिव को अगली सुनवाई में सशरीर उपस्थित होने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई 16 जनवरी को करने का आदेश दिया। साथ ही सभी पक्षों को अपना जवाब दाखिल करने को कहा। हाईकोर्ट ने कहा था तीन हफ्ते में जारी करें अधिसूचना पूर्व पार्षद रोशनी खलखो और अरुण झा की ओर से दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते बीते साल जनवरी में हाईकोर्ट ने तीन हफ्ते के भीतर चुनाव को लेकर अधिसूचना जारी करने को कहा था। पर यह नहीं हो सका। राज्य के 34 नगर निकायों में चुनाव लंबित है। इनमें से 14 में मई 2020 से ही चुनाव लंबित है।
धनबाद, देवघर और चास नगर निगम सहित विश्रामपुर, झुमरी तिलैया, गोमिया और चक्रधरपुर नगर परिषद और कोडरमा, बड़की सरिया, धनवार, हरिहरगंज, बचरा और महगामा नगर पंचायत का कार्यकाल मई 2020 में ही पूरा हो गया है। अन्य 34 नगर निकायों का कार्यकाल भी बीते साल मई में पूरा हो गया। अफसरों के हवाले निकायों की व्यवस्था रांची, हजारीबाग, गिरिडीह, मेदिनीनगर और आदित्यपुर नगर निगम, गढ़वा, चतरा, मधुपुर, गोड्डा, साहिबगंज, पाकुड़, मिहिजाम, चिरकुंडा, फुसरो, गुमला, लोहरदगा, सिमडेगा, रामगढ़, चाईबासा और कपाली, नगर उंटारी, हुसैनाबाद, छतरपुर, लातेहार, डोमचांच, राजमहल, बरहरवा, बासुकीनाथ, जामताड़ा, खूंटी, बुंडू और सरायकेला-खरसांवा में भी निकाय बोर्ड इसी साल भंग हो गया है। अभी इनकी व्यवस्था अफसर संभाल रहे हैं। क्यों नहीं हुआ है चुनाव राज्य सरकार ने ओबीसी आयोग गठन कर पंचायत और निकाय चुनाव में ओबीसी को आरक्षण देने के लिए थ्री लेयर टेस्ट की प्रक्रिया पूरी करने की बात कही थी। लेकिन झारखंड सरकार अब तक आयोग का गठन कर ही नहीं सकी है। सरकार ने कहा था कि ओबीसी उम्मीदवारों को सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक सर्वेक्षण कर आरक्षण देगी। ऐसा नहीं हो पाने की वजह से अब तक चुनाव नहीं हो सका।


