झारखंड में नगर निकाय चुनाव के लिए अभी इंतजार करना होगा। झारखंड हाईकोर्ट के आदेशानुसार 16 मई तक चुनाव कराए जाने की स्थिति में राज्य सरकार नहीं है। ऐसे में नगर विकास विभाग हाईकोर्ट से और ढाई महीने का समय मांगेगा। विभाग के अनुसार निकाय चुनाव के िलए जनवरी से अब तक की गई तैयारियों की जानकारी कोर्ट को दी जाएगी। कोर्ट को विश्वास दिलाया जाएगा कि ढाई माह बाद नगर निकाय चुनाव करा लिया जाएगा। ऐसे में कम से कम ढाई महीने का समय और दिया जाए। बता दें कि रोशनी खलखो और अन्य की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को चार महीने में नगर निकाय चुनाव कराने का आदेश दिया था। यह अवधि 16 मई को खत्म हो रही है। कोर्ट ने चुनाव की देरी पर नाराजगी जताते हुए कहा था कि ओबीसी आरक्षण के लिए ट्रिपल टेस्ट प्रक्रिया के नाम पर चुनाव आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। सुनवाई के दौरान राज्य की मुख्य सचिव अलका तिवारी और नगर विकास सचिव सुनील कुमार कोर्ट में उपस्थित थे। झारखंड में नगर निकायों का कार्यकाल अप्रैल 2023 में ही समाप्त हो गया है। अबतक कौन-कौन सी तैयारी पूरी हुई सभी जिलों ने आयोग को सौंपी ट्रिपल टेस्ट की रिपोर्ट झारखंड के सभी 24 जिलों ने पिछड़ा वर्ग आयोग को ट्रिपल टेस्ट की रिपोर्ट सौंप दी है। किन-किन नगर निकायों में पिछड़े और अत्यंत पिछड़े वर्गों के मतदाताओं की संख्या कितनी है, इसके बारे में आयोग अवगत हो चुका है। ग्राउंड जीरो पर औचक निरीक्षण कर आयोग के सदस्यों ने इसकी जांच भी पूरी कर ली है। अपडेट वोटर लिस्ट मिली भारत निर्वाचन आयोग ने निकाय चुनाव को ध्यान में रखते हुए अपडेट वोटर लिस्ट राज्य निर्वाचन आयोग को सौंप दिया है। इस वोटर लिस्ट को बूथवार अलग-अलग किया जा रहा है। 3. पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण का प्रतिशत कौन तय करेगा, निश्चित नहीं ट्रिपल टेस्ट होने के बाद सबसे महत्वपूर्ण यह है कि पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण का प्रतिशत तय हो। लेकन, यह प्रतिशत कौन तय करेगा। इसपर फैसला नहीं लिया गया है। कहां फंसा है पेंच… इसके लिए एक आयोग का गठन किया जाना है, पर इस बारे में अभी निर्णय नहीं हो पा रहा है। पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष और राज्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के बाद ही इस पर से पर्दा हट पाएगा। पहले क्या थी व्यवस्था पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष को ही यह शक्ति मिली थी कि वह आरक्षण का प्रतिशत तय कर सकें। राज्य सरकार इस बार भी पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष को ही यह दायित्व देने पर विचार कर रही है। 2. राज्य चुनाव आयोग के आयुक्त का पद भी खाली, चुनाव का काम अटका राज्य चुनाव आयोग में अभी चुनाव आयुक्त नहीं है। कार्यकाल पूरा होने के बाद पूर्व राज्य चुनाव आयुक्त डीके तिवारी पदमुक्त हो चुके हैं। उन्होंने पूर्व में चुनाव की तैयारियों का काम आगे बढ़ाया था। क्या हो रहा असर… राज्य चुनाव आयुक्त का पद खाली होने की वजह से चुनाव के अधिकतर छोटे-बड़े काम रुके पड़े हैं। बूथों का गठन, मतदाता पत्रों का विखंडन और चुनाव प्रशिक्षण जैसे महत्वपूर्ण काम अटक गए हैं। अध्यक्ष की नियुक्ति में देरी पंचायती राज विभाग की ओर से यह नियुक्ति होती है। लेकिन, इस पर फैसला मुख्यमंत्री के स्तर पर होता है। अभी नियुक्ति की फाइल ऊपर-नीचे हो रही है। उम्मीद की जा रही है कि सरकार जल्द चुनाव आयुक्त नियुक्त करेगी। 1. पिछड़ा वर्ग आयोग में अध्यक्ष का पद खाली, रिपोर्ट नहीं भेजी जा सकती झारखंड राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग में अभी अध्यक्ष पद खाली है। दो सदस्य और एक सदस्य सचिव काम कर रहे हैं। पिछड़ा आयोग के पूर्व अध्यक्ष योगेंद्र प्रसाद अभी राज्य सरकार के मंत्री हैं। क्या पड़ रहा असर… पिछड़ा वर्ग आयोग का अध्यक्ष नहीं होने से ट्रिपल टेस्ट की रिपोर्ट राज्य सरकार को नहीं भेजी जा सकती है। जब तक रिपोर्ट पर अध्यक्ष का हस्ताक्षर नहीं होगा, रिपोर्ट को मान्यता नहीं दी जा सकती है। नियुक्ति नहीं होने के कारण कल्याण विभाग अध्यक्ष की नियुक्ति करता है। पर, फैसला मुख्यमंत्री के स्तर पर होता है। नगर विकास विभाग के आग्रह के बाद कल्याण विभाग ने नियुक्ति की फाइल मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी है, जिस पर निर्णय होना है।


