उदयपुर नगर निगम के बहुचर्चित 272 प्लॉटों के घोटाला मामले में एसओजी ने छठे आरोपी को बीती रात गिरफ्तार किया है। आरोपी ने हिरणमगरी के एक प्लॉट के दस्तावेजों में फर्जी लिखावट कर निगम से किसी और के नाम प्लॉट की लीज डीड जारी करवा दी थी। एसओजी एएसपी स्वाति शर्मा ने बताया कि मामले की नगर निगम ने 2022 में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया कि हिरणमगरी सेक्टर-3 में निगम का 708 नंबर प्लॉट है। यह यूआईटी से निगम को हस्तांतरित हुआ था। यूआईटी कॉलोनी, पुरोहितों की मादड़ी निवासी दीपक सिंह चौहान ने प्लॉट के दस्तावेजों, आवंटन पत्र, कब्जा पत्र और कार्यालय टिप्पणी पर फर्जी लिखावट की। फिर बाघपुरा निवासी भरत कुमार भट्ट के नाम निगम से लीज डीड जारी करवा दी। इसी मामले में एसओजी की टीम ने दीपक सिंह को गिरफ्तार किया। टीम आरोपी के लिखावट के सैंपल लेकर एफएसएल को भेजेगी। टीम उससे अन्य आरोपियों के बारे में पूछताछ कर रही है। बता दें, इस मामले में राकेश सोलंकी, दीपक, किशनलाल, राजेन्द्र धाकड़ और राजदीप वाल्मिकी की गिरफ्तारी हो चुकी है। राज्यपाल कटारिया सहित विधायक उठा चुके हैं ये मुद्दा
जानकारी अनुसार यूआईटी ने साल 2012 में नगर निगम को कुछ कॉलोनियां हस्तांतरित की थी। इनमें कई भूखंड खाली और अधिकांश कॉर्नर के थे। सारसंभाल नहीं करने से लोगों ने इन पर कब्जा कर लिया। कई भूखंडों के फर्जी दस्तावेज बनवाकर नामांतरण खुलवा लिए गए। कुछ को दलालों ने बेच दिया। इस मुद्दे को साल 2022 में कांग्रेस सहवृद पार्षद अजय पोरवाल ने उठाया था। जांच के बाद 48 पट्टों को निगम ने निरस्त किया। इस बीच पंजाब के गवर्नर गुलाबचंद कटारिया और वर्तमान विधायक ताराचंद जैन ने भी इस मुद्दे को उठाया था और इसे 500 करोड़ रुपए का घोटाला बताया था।


