निगम ने फिर शुरू किया वसूली भंडार:खुद की दुकान पर लगे पोस्टर के मांगे 64 लाख रुपए 39 को नोटिस

एक शोरूम पर कार्रवाई, बाकी पर भी गाज गिराने की तैयारी खुद की दुकान पर लगे बोर्ड और पोस्टर के नाम पर निगम ने फिर से व्यापारियों को वसूली के नोटिस जारी कर दिए हैं। 39 व्यापारियों को एक साल पहले ये नोटिस दिए गए थे। बुधवार को अचानक एक शोरूम पर टीम पहुंची और वहां लगा पोस्टर हटा दिया। व्यापारियों के कड़े विरोध के बाद करीब दो साल पहले निगम ने इससे हाथ खींच लिए थे। बुधवार को निगम ने रेसकोर्स रोड स्थित ज्वेलरी शोरूम पंजाबी सर्राफ पर कार्रवाई की। वहां लगे पोस्टर के लिए निगम ने जीएसटी सहित 64 लाख रुपए का टैक्स मांगा है। ऐसे ही नोटिस निगम ने 39 अन्य व्यापारियों को भी जारी किए हैं, जिनसे करोड़ों का टैक्स मांगा गया है। ये नोटिस मप्र मीडिया आउटडोर पॉलिसी 2017 के तहत जारी किए गए हैं। निगम का कहना है कि फर्म ने करीब 1500 वर्गफीट पर विज्ञापन प्रदर्शित किया था। फरवरी 2024 में नोटिस जारी किया था। एक साल (365 दिनों) के हिसाब से 10 रुपए प्रति वर्गफीट टैक्स राशि का नोटिस दिया गया था। 54,75,000 टैक्स और 18 प्रतिशत जीएसटी सहित 64 लाख 60 हजार 500 रुपए का जुर्माना लगाया गया है। जबकि पोस्टर पर न तो किसी ज्वेलरी ब्रांड का नाम था और न ही शोरूम का ही नाम लिखा हुआ था। केवल एक महिला का चित्र लगा हुआ था। व्यापारी ने जब इस बारे में बात कि तो निगम टीम का कहना था कि ज्वेलरी पहने महिला का चित्र लगा है तो टैक्स चुकाना ही पड़ेगा।
दो साल पहले विरोध के चलते रोकना पड़ी थी कार्रवाई जिन्हें नोटिस दिए थे, उन सभी पर होगी कार्रवाई
एमआईसी सदस्य राजस्व विभाग प्रभारी निरंजन सिंह चौहान ने बताया कि गुरुवार को भी रिमूवल विभाग की टीम बोर्ड या फ्लैक्स हटाने जाएगी। मप्र मीडिया आउटडोर पॉलिसी के तहत कोई भी दुकानदार तीन बाग तीन से बड़ा बोर्ड नहीं लगा सकता है। बड़ा सवाल व्यापारियों पर सख्ती तो अवैध होर्डिंग्स को छूट क्यों
कार्रवाई को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि व्यापारियों द्वारा खुद की दुकान पर लगे होर्डिंग पर निगम टैक्स वसूल रहा है तो फिर शहर में लगे अवैध होर्डिंग पर कार्रवाई क्यों नहीं की जाती। नेताओं के जन्मदिन, राजनीतिक यात्रा आदि पर पूरे शहर को अवैध होर्डिंग, बैनर-पोस्टर से पाट दिया जाता है। तब निगम ऐसी तत्परता क्यों नहीं दिखाता ? ईमानदारी से टैक्स चुकाने वाले व्यापारियों से ही गनगानी वसूली क्यों?

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *