निगरानी, रिपोर्टिंग और जागरुकता

पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस संक्रमण के दो संदिग्ध मरीज िमलने के बाद झारखंड सरकार पूरी तरह सतर्क हो गई है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने सभी जिलों के सिविल सर्जनों को अलर्ट मोड में रहने का निर्देश दिया है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह को भी निगरानी, त्वरित रिपोर्टिंग और आवश्यक तैयारी सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देश दिए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी संदिग्ध मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत रिपोर्टिंग और आइसोलेशन की व्यवस्था की जाए, ताकि राज्य में संक्रमण फैलने से पहले ही उस पर काबू पाया जा सके। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि जन-जागरूकता सबसे बड़ा हथियार है। लोगों को लक्षणों, बचाव के तरीकों और सावधानियों की पूरी जानकारी दी जाए, ताकि किसी भी तरह की लापरवाही न हो। विशेषज्ञों के अनुसार, निपाह वायरस की पुष्टि के लिए विशेष लैब टेस्ट की जरूरत होती है, जो सरकारी स्तर पर अधिकृत लैब में किए जाते हैं। संदिग्ध मरीजों की यात्रा इतिहास (ट्रैवल हिस्ट्री), संपर्क इतिहास और लक्षणों के आधार पर पहले उन्हें आइसोलेट किया जाता है, फिर सैंपल जांच के लिए भेजा जाता है। डॉ. संजय सिंह के अनुसार यदि समय रहते मरीज की पहचान हो जाए और उसे आइसोलेट कर उचित सपोर्टिव ट्रीटमेंट दिया जाए तो जान बचने की संभावना बढ़ जाती है। रिम्स के मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. संजय कुमार सिंह के अनुसार निपाह वायरस काफी खतरनाक जूनोटिक बीमारी है, यानी यह जानवरों से इंसानों में फैलती है। इसकी सबसे बड़ी चिंता इसकी उच्च मृत्यु दर है, जो अलग-अलग प्रकोप में 40 से 75 प्रतिशत तक देखी गई है। यह वायरस मुख्य रूप से फल खाने वाले चमगादड़ों (फ्रूट बैट्स) में पाया जाता है। चमगादड़ों के संपर्क में आए फल, उनके लार या मल से दूषित भोजन के सेवन से संक्रमण फैल सकता है। {गिरे हुए या आधे कटे फलों का सेवन न करें {फल खाने से पहले अच्छी तरह धो लें {कच्चा खजूर का रस या खुले में रखा जूस पीने से बचें {चमगादड़ों- जंगली जानवरों के संपर्क से बचें {किसी व्यक्ति में गंभीर बुखार व लक्षण हों तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें {संदिग्ध मरीज के संपर्क में आने पर मास्क और हाथ की सफाई का विशेष ध्यान रखें जानवर से इंसान और इंसान से इंसान तक खतरा विशेषज्ञों के मुताबिक निपाह वायरस तीन प्रमुख तरीकों से फैल सकता है। चमगादड़ों से दूषित फल या रस के सेवन से, संक्रमित जानवरों, विशेषकर सूअरों के संपर्क से, संक्रमित व्यक्ति के नजदीकी संपर्क से, खासकर अस्पतालों और घरों में देखभाल के दौरान। लक्षण : सामान्य बुखार से लेकर कोमा तक का खतरा डॉ. संजय सिंह के अनुसार निपाह वायरस के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल संक्रमण जैसे हो सकते हैं, जिससे लोग भ्रमित हो सकते हैं। लेकिन कुछ लक्षण गंभीर खतरे की ओर इशारा करते हैं। मुख्य लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, खांसी और गले में खराश, सांस लेने में तकलीफ, उल्टी और कमजोरी, मानसिक भ्रम, चक्कर आना, मस्तिष्क में सूजन (एन्सेफेलाइटिस) आदि शामिल हैं। वहीं, गंभीर मामलों में कोमा तक का खतरा रहता है। डॉ. संजय सिंह ने कहा कि यदि बुखार के साथ मानसिक स्थिति में बदलाव, अत्यधिक सुस्ती या बेहोशी के लक्षण दिखें तो नजरअंदाज नहीं करें। विशेषज्ञों का कहना है कि निपाह वायरस गंभीर जरूर है, लेकिन समय पर पहचान, सावधानी और जागरूकता से इसके फैलाव को रोका जा सकता है। सरकार और स्वास्थ्य विभाग की तैयारी के साथ-साथ आम लोगों की समझदारी ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है, घबराएं नहीं। झारखंड में अभी निपाह की पुष्टि नही हुई है।

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