भास्कर न्यूज | बालोद जिला मुख्यालय के मातृ शिशु केंद्र (चाइल्ड हॉस्पिटल) में सोमवार को पहुंचकर सीएमएचओ डॉ. एमके सूर्यवंशी ने 4 गर्भवती महिलाओं को इंजेक्शन लगाया, तब सिजेरियन प्रसव हो पाया। दरअसल निजी अस्पताल के निश्चेतना विशेषज्ञ छुट्टी पर थे। डॉ. सूर्यवंशी सीएमएचओ के अलावा निश्चेतना विशेषज्ञ भी है। इस वजह से आपातकाल में मातृ शिशु केंद्र में सेवाएं देते हैं। सीएमएचओ के अलावा वैकल्पिक व्यवस्था के तहत अस्पताल प्रबंधन की ओर से सिजेरियन प्रसव के लिए निजी अस्पताल के निश्चेतना विशेषज्ञ डॉ. विक्रांत केशरिया की ऑनकॉल ड्यूटी लगाई गई है। हालांकि शासन स्तर से स्थाई रेगुलर निश्चेतना विशेषज्ञ नहीं होने की वजह से वैकल्पिक व्यवस्था के बावजूद केस रेफर कराने की नौबत आ रही है। हर माह औसत 35 केस रेफर हो रहें है। यह न्यूनतम आंकड़ा है। परिस्थिति अनुसार किसी माह 35 से ज्यादा केस रेफर होते है। इसकी मुख्य वजह यह है कि वैकल्पिक व्यवस्था के तहत निजी अस्पताल के जिस निश्चेतना विशेषज्ञ की ऑनकॉल ड्यूटी लगाई गई है, उन्हें परिस्थिति अनुसार प्रबंधन की ओर से बुलाया जाता है। तर्क देते है कि कई कारणों से पर्याप्त समय नहीं दे पाते। इस वजह से ऐसी नौबत आती है। सीएमएचओ को पूरे जिले की जिम्मेदारी है, ऐसे में वह भी पर्याप्त समय नहीं दे पाते। यहां हर माह औसतन 20 सिजेरियन प्रसव होते हैं मातृ शिशु केंद्र में हर माह औसत 20 सिजेरियन प्रसव हो रहे हैं। परिस्थिति अनुसार कभी कम तो कभी ज्यादा होता है। जबकि इससे ज्यादा केस रेफर कराने की नौबत आ रही है। प्रबंधन भी स्वीकार कर रही है कि यहां सिजेरियन प्रसव कराना है तो दो दिन पहले भर्ती होना पड़ेगा। इसी हिसाब से दोनों विशेषज्ञ समय तय करते है कि कब सिजेरियन प्रसव होगा। इमरजेंसी केस आने पर रेफर करने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं होता। रेगुलर विशेषज्ञ नहीं होने से सरकारी की तुलना में निजी अस्पतालों में ज्यादा प्रसव हो रहे हैं। जिले की गर्भवतियों को निजी अस्पतालों में जाना मजबूरी है शहरी व ग्रामीण क्षेत्र की गर्भवती प्रसव कराने मितानिनों व परिजन के साथ जिला अस्पताल के बगल मातृ शिशु केंद्र पहुंचती है। यहां आने के बाद प्रबंधन की ओर से भर्ती प्रक्रिया पूरी कराकर बेड उपलब्ध कराया जाता है। जिसके बाद स्त्री रोग विशेषज्ञ या निश्चेतना विशेषज्ञ दोनों में से एक मौजूद नहीं रहते तो किसी भी समय केस रेफर कर दिया जाता है। विजय साहू ने बताया कि तीन दिन पहले सिजेरियन प्रसव कराने के उद्देश्य से पत्नी को भर्ती कराया था लेकिन विशेषज्ञ के नहीं होने और तेज दर्द होने पर प्रबंधन की ओर से आनन फानन में केस रेफर किया, तब निजी अस्पताल में जाकर प्रसव कराना पड़ा।


