वन विभाग की ओर से हाल ही में बुरहानपुर वन मंडल क्षेत्र में सलई के पेड़ों से गोंद निकालने के लिए करीब 6 लाइसेंस जारी किए गए हैं जबकि फरवरी माह में तत्कालीन डीएफओ ने इस पर प्रतिबंध का आदेश जारी किया था। जिले में सिर्फ खकनार ब्लॉक ही पेसा एक्ट के तहत आता है, लेकिन वन विभाग ने शाहपुर और बोदरली रेंज की भी समितियों को लाइसेंस आवंटित किए हैं। इसे लेकर पर्यावरण कार्यकर्ता जितेंद्र रावतोले ने वन विभाग को शिकायत कर लाइसेंस निरस्त करने की मांग की है। शिकायत में कहा गया है कि प्रभारी डीएफओ ने 6 लाइसेंस जारी किए हैं। वहीं जिले में पहले से ही सलाई के पेड़ों को नुकसान पहुंचाया गया है उसके बावजूद केमिकल डालकर पेड़ों से गोंद निकालने की तैयारी की जा रही है। तत्कालीन डीएफओ ने 14 फरवरी 24 को गोंद निकालने पर बैन लगाया था। लेकिन अब फिर से जांच किए बिना ही 10 महीने में ही दोबारा लाइसेंस दे दिए गए। बताया ज रहा है कि जिले की वन समितियों ने इसके विरोध की तैयारी कर ली है, क्योंकि जिले में सलाई के पेड़ों का अस्तित्व समाप्त होने की कगार पर है। केमिकल का उपयोग सलाई के पेड़ों क लिए घातक माना जाता है। ‘सलाई के पेड़ों की सतत मॉनिटरिंग करते हैं’
इसे लेकर बुरहानपुर वन विभाग एसडीओ अजय सागर का कहना है कि कुछ शिकायतें आती है कि केमिकल का इस्तेमाल कर गोंद निकालते हैं। इसलिए हम सतत मॉनिटरिंग कर रहे हैं। वर्किंग प्लान रहता है उसके आधार पर लाइसेंस जारी किए हैं। पिछले साल की तुलना में गोंद के माध्यम से रोजगार मिला है। करीब 15 हजार लोग जुड़े हैं। अगर शिकायत आती तो जांच करेंगे। केमिकल से पेड़ों को नुकसान जरूर होता है लेकिन ऐसा न हो इसके प्रयास किए जा रहे हैं।


