भास्कर न्यूज | जालंधर निर्जला एकादशी का व्रत अन्य एकादशी की अपेक्षा कठिन माना जाता है। हिंदू धर्म में इस एकादशी का बेहद खास महत्व है। जोकि इस बार 6 जून शुक्रवार को रहेगी। इस दिन श्रद्धालु भगवान विष्णु के लिए पूरे दिन बिना पानी पिए निर्जल उपवास रखेंगे। साथ ही जल से भरे मटके पर आम, चीनी, पंखा, तोलिया रखकर दान करें। विद्वानों के अनुसार इस दिन एकादशी उपवास करने से सालभर की सभी एकादशियों जितना पुण्य मिलता है। ऐसा शास्त्रों में लिखा है। इसलिए इस एकादशी पर अपने पितरों की शांति के लिए ठंडे पानी, भोजन, कपड़े, छाते और जूते-चप्पल का दान किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक निर्जला एकादशी के व्रत के दौरान जल ग्रहण नहीं किया जाता है। एकादशी व्रत के नियम के मुताबिक, पारण के बाद ही जल ग्रहण किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक निर्जला एकादशी का व्रत रखने से सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिल जाती है। कहा जाता है कि जो लोग इस व्रत को विधिपूर्वक करते हैं, उनकी हर इच्छा पूरी होती है। माना जाता है कि इस एकादशी का व्रत रखने से मृत्यु के उपरांत मोक्ष की प्राप्ति होती है। श्री शिव दुर्गा खाटू श्याम मंदिर बस्ती पीरदाद रोड कमल विहार के पुजारी गौतम भार्गव ने बताया कि निर्जला एकादशी सभी व्रतों में कठिन है यह उपवास निर्जल रहकर किया जाता है। यह व्रत किसी भी प्रकार के भोजन अथवा फल के बिना किया जाता है। निर्जला एकादशी का उपवास जो श्रद्धालु पुरे साल में पड़ने वाली सभी 24 एकादशी पर उपवास नहीं रख सकते हैं। वह केवल इस एकादशी का व्रत कर लें तो भी सभी 24 एकादशियों के उपवास का फल मिल जाता हैं। इस एकादशी को पांडव अथवा भीमसेन एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन व्रत करने वाला श्रद्धालु खूद भूखा प्यासा रखकर ब्राह्मणों को शुद्ध पानी से भरा घड़ा, फल अथवा दान दक्षिणा भेंट करता है। उससे व्रत अधिक फल मिलता है। इस दिन पुरे देशभर में जगह जगह ठंडे मीठे पानी की छबीले लगाई जाती है। इन बातों का लें संकल्प { व्रत वाले दिन सुबह स्नान आदि करके भगवान विष्णु का पीले पुष्प, गंधक आदी से पूजन करें व भगवान के समक्ष व्रत का संकल्प करें और व्रत को आरंभ करें। { मानसिक तौर पर मज़बूत होने के लिए पूरा दिन भगवान के मनन और पूजन जप अथवा ध्यान में व्यतीत करें। { क्रोध लड़ाई झगड़ा या किसी की निंदा ना करें। जरूरतमंदों को एंव ब्राह्मणान अथवा मंदिर आदि में जल से भरा मिट्टी का घड़ा, सरबत मौसम के अनुसार, फल, वस्त्र और हाथ वाला पंखा एंव दक्षिणा आदि भेंट करें। { कामगारों मजदूरों व राहगीरों को नींबू की शिकंजी ज़रूर पिलाये। { इस दिन अपने घर की छत पर अथवा खुले स्थान पर पशु पक्षियों के लिए जल, अनाज दाने का प्रबंध ज़रूर करें। { गउशाला में जाकर गौ माता को चारा एंव जल ज़रूर पिलाए।


