गुरमीत लूथ्ररा | अमृतसर यूरोपियन यूनियन के साथ ट्रेड डील से जहां भारत का निर्यात बढ़ेगा वहीं रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। पंजाब की बात करें तो एक साल में ही टेक्सटाइल सेक्टर के तहत सिर्फ वूलन (शॉल) उद्योग का निर्यात ही सालाना 800-900 करोड़ से 65 प्रतिशत बढ़कर 1500 करोड़ होने का उम्मीद है। उद्योगपतियों का कहना है कि बंगलादेश में अस्थिरता का फायदा सीधे तौर पर भारत को हासिल हुआ है। यूरोपियन यूनियन के 27 देशों ने अब बंगलादेश और वियतनाम की बजाय भारत जैसे एशियन देशों से माल मंगवाने के लिए करार पर मोहर लगा दी है। पंजाब प्रदेश व्यापार मंडल के प्रधान प्यारे लाल सेठ एवं महासचिव समीर जैन ने कहा कि समझौते के चलते यूरोपियन देशों में निर्यात के द्वार पूरी तरह से खुल गए हैं। इन देशों को भारत से 3 हजार करोड़ का सालाना टैक्सटाइल वस्तुओं का निर्यात हो रहा है जो एक-दो साल में बढ़कर डबल होने की संभावना है। निर्यात बढ़ने से दिल्ली, मुम्बई, गुजरात, पंजाब में बंद पड़े यूनिट्स के दोबारा शुरू होने की उम्मीद है। पंजाब से हो रहे सालाना 800-900 करोड़ के निर्यात में 70 प्रतिशत अकेला शॉल-कंबल का शामिल है। 70 प्रतिशत निर्यात केवल दो शहरों लुधियाना और अमृतसर से हो रहा है, शेष निर्यात हो रही 30% वस्तुओं में हौजरी, रेडीमेड गारमेंट्स और निटवेयर वस्तुएं शामिल हैं। पहले टैक्सटाइल सेक्टर में भारत का कंपीटिशन बंगलादेश से था मगर वहां हालात खराब होने की वजह से उद्योग बंद होने के कगार पर हैं। टेक्सटाइल्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के प्रधान दीपक खन्ना और महासचिव राजीव खन्ना ने कहा यूरोपियन यूनियन से ट्रेड डील के चलते भविष्य में पंजाब की डूबती टेक्सटाइल इंडस्ट्री के पटरी पर लौटने की संभावना है। 20 साल पहले अकेले अमृतसर में ही 1100-1200 टेक्सटाइल यूनिट्स थे जो केंद्र व राज्य सरकारों की गलत नीतियों के नतीजतन आज 600-700 बचे हैं। बाकी यूनिट्स या तो बंद हो गए हैं या यहां से पलायन कर अन्य राज्यों में शिफ्ट हो गए। अब यूरोपियन यूनियन के साथ करार के बाद आशा की नई किरण जगी है तथा इन यूनिट्स के फिर से स्थापित होने की संभावना है। गौरतलब है कि भारत यूरोपियन देशों को 12 प्रतिशत ड्यूटी के साथ निर्यात करता था अब टेक्सटाइल निर्यात ड्यूटी फ्री होगा। उन्होंने कहा किया कि भारत में बनने वाले कपड़े की क्वालिटी बंगलादेश-वियतनाम व अन्य मुल्कों से बिढ़या है इसलिए भारत के भी प्रमुख निर्यातक देशों में शामिल होना तय है।


