हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका को खारिज कर याचिकाकर्ता पर 15 हजार रुपए जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता ने अहम तथ्यों को छुपाया, जिससे यह प्रतीत होता है कि याचिका स्वच्छ नीयत से दाखिल नहीं की गई थी। चीफ जस्टिस शील नागू, जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता ने यह खुलासा नहीं किया कि उनका वकालत का लाइसेंस 23 नवंबर, 2022 को बार काउंसिल ऑफ पंजाब एंड हरियाणा ने निलंबित किया था। इसके अलावा याचिकाकर्ता ने यह भी नहीं बताया कि उन्होंने अपनी निलंबन को चुनौती दी थी, जिसे 28 मई को पैरवी न करने के चलते खारिज कर दिया गया था। हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता को न्याय के सिद्धांतों के तहत पूर्ण पारदर्शिता बरतनी चाहिए थी और सभी आवश्यक जानकारियां सामने रखनी चाहिए थीं। लेकिन याचिकाकर्ता ने तथ्यों को जानबूझ कर छिपाया, जिससे यह मामला दुर्भावनापूर्ण प्रतीत होता है। याचिकाकर्ता जालंधर निवासी सिमरनजीत सिंह ने जनहित याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि जालंधर स्थित पीएसपीसीएल में भ्रष्टाचार हो रहा है और राशि डिफाल्टर्स से वसूल की जानी बाकी है। हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर कहा कि याचिकाकर्ता ने अपने बारे में सही जानकारी नहीं दी, लिहाजा याचिका को खारिज किया जा रहा है।


