जीदा गांव में हुए ब्लास्ट मामले में जांच के लिए मंगलवार को दिल्ली से एनआईए टीम बठिंडा पहुंची। एनआईए ने डीएसपी सौरभ गुप्ता के नेतृत्व में गांव जीदा में घटनास्थल का दौरा किया। फिर टीम ने बठिंडा एम्स में दाखिल आरोपी गुरप्रीत सिंह से अकेले में बातचीत की। करीब 1 घंटे पूछताछ करने के बाद एनआईए टीम वापस दिल्ली के लिए रवाना हो गई। पुलिस सूत्रों के अनुसार गुरप्रीत विस्फोटक सामग्री से बेल्ट बना रहा था, जिसे जेएंडके के कठुआ ले जाना था। वहीं, पुलिस गुरप्रीत सिंह के घर में बिखरी विस्फोटक सामग्री को डिस्पोज करने में 6 दिन बाद भी नाकाम रही है। पता चला है कि विस्फोटक सामग्री नष्ट करने के लिए पुलिस ने रोबोट मंगवाया था, जो खराब हो गया। उसे अब सही करने के लिए भेजा गया है। उधर, गुरप्रीत सिंह के खातों की डिटेल पुलिस को नहीं मिल पाई। पुलिस सूत्रों के मुताबिक धमाके के बाद पीला पाउडर मिला है, जिसे पिकरिक एसिड (विस्फोटक रासायनिक यौगिक) माना जा रहा है। गुरप्रीत के फोन में पिकरिक एसिड की तस्वीरें मिली हैं। संदेह है कि उसने कई खतरनाक रसायन ऑनलाइन मंगवाए थे। उसने यूट्यूब पर वीडियो देखकर उन मिश्रण को मिक्स कर बम तैयार किया था। शक है कि इन्हीं रसायनों के मिश्रण से धमाके हुए, जिनमें गुरप्रीत और उसके पिता जगतार सिंह घायल हुए। गुरप्रीत की हाथ की सर्जरी के बाद वह एम्स में भर्ती है और उसकी हालत में सुधार होने के बाद गिरफ्तारी होगी। वहीं, गुरप्रीत के पिता जगतार सिंह को आंखों में चोट लगने के कारण फरीदकोट रेफर किया गया है। फॉरेंसिक रिपोर्ट आनी बाकी है। जांच में यह सामने आया कि उसके पास अमोनियम नाइट्रेट, अमोनियम सल्फेट, लेड नाइट्रेट और फॉस्फोरस पेंटॉक्साइड जैसे रसायन मौजूद थे। बम तैयार करने के लिए मंगवाया रसायन इतना खतरनाक कि रोबोट भी क्षतिग्रस्त आरोपी गुरप्रीत के घर में पड़ी विस्फोटक सामग्री को नष्ट करना पुलिस के लिए आसान नहीं था। इसी वजह से पीएपी जालंधर से विशेष दस्ते को बुलाया गया गया। दस्ते ने रोबोट की मदद से रसायनों को नष्ट करने का काम किया, लेकिन धमाकों के कारण रोबोट भी क्षतिग्रस्त हो गया।


