निवाड़ी के छोटे तालाब के पास रहने वाले लोग बंदरों के आतंक से बुरी तरह परेशान हैं। प्रशासन एक-दूसरे पर जिम्मेदारी थोपने पर जुटा हुआ है। काले मुंह वाले बंदरों ने यहां के लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। हालात यह हैं कि लोग अपने घरों से बाहर निकलने में भी डरने लगे हैं। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से तुरंत कार्रवाई की मांग की है। कुल मिलाकर समस्या और समाधान के बीच दोनों अधिकारियों के बयान तो इसी तरफ इशारा करते हैं जनता अपनी समस्या से स्वयं निपट ले। क्योंकि वन विभाग ने नगरीय प्रशासन को जिम्मेदारी दी है और नगरीय प्रशासन वन विभाग से बात कर रहा है। बच्चों को स्कूल भेजने में लग रहा डर स्थानीय निवासी प्रवीण मलारया ने बताया, “हमारे घरों के आसपास बंदरों का आतंक इतना बढ़ गया है कि हम घर से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। बच्चों को स्कूल भेजने में डर लगता है और महिलाओं के लिए बाजार जाना मुश्किल हो गया है। लोगों का कहना है कि बंदर न केवल उनके घरों में घुस जाते हैं, बल्कि खाने-पीने की चीजें भी उठा ले जाते हैं। इन बंदरों की हरकतों से छोटे बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। अधिकारियों ने झाड़ा पल्ला जब हमने इस पूरे मामले पर निवाड़ी वनपरिक्षेत्र अधिकारी आमिर खान से बात की तो उन्होंने बताया कि 2022 वाइल्ड लाइफ एक्ट से बंदर को निकाल दिया गया है। ऐसे में नगरी क्षेत्र की जिम्मेदारी है कि वह लोगों को इस समस्या से निजात दिलाए। वही जब निवाड़ी सीएमओ अरविंद तिवारी कहते है कि हम वन विभाग के अधिकारियों से संपर्क करेंगे। उसके बाद क्या डिसीजन होता है, हम बताते हैं।


