भगत देवरी| ग्राम भगत देवरी में सालों पहले बनाया गया निस्तारित तालाब (पचरी) आज प्रशासनिक उदासीनता और सामाजिक लापरवाही का शिकार होकर शराबियों का अड्डा बनता जा रहा है। यह वही तालाब है, जिससे गांव के सैकड़ों ग्रामीण रोजमर्रा की आवश्यकताओं के लिए पानी का उपयोग करते हैं चाहे वह नहाने का हो, कपड़े धोने के लिए। ग्रामीणों का कहना है कि दिन के समय तालाब सामान्य रूप से उपयोग में रहता है, लेकिन जैसे ही शाम ढलती है, तालाब का माहौल पूरी तरह बदल जाता है। आसपास के इलाकों से शराबी यहां एकत्र होकर खुलेआम शराब सेवन करते हैं। शराब पीने के बाद बोतलों को वहीं तोड़कर फेंक दिया जाता है, जिससे तालाब परिसर कांच के टुकड़ों से भर जाता है। इससे ग्रामीणों को डर है कि दूषित पानी के उपयोग से त्वचा रोग, पेट संबंधी बीमारियां और अन्य संक्रमण फैल सकते हैं, खासकर बच्चों और बुजुर्गों में। महिलाएं बताती हैं कि सुबह तालाब पर जाने में डर लगता है, क्योंकि रात में तोड़ी गई कांच की बोतलें पैरों में चुभने का खतरा पैदा करती हैं। कई बार मवेशी भी इन कांच के टुकड़ों से घायल हो चुके हैं। इन सब गतिविधियों की जानकारी के बाद भी पंचायत स्तर पर कोई ठोस पहल नहीं हुई और न ही प्रशासनिक अमले द्वारा नियमित निगरानी की जा रही है।


