नीमकाथाना जिला खत्म करने का मामला हाईकोर्ट पहुंचा:पूर्व विधायक ने याचिका में कहा-राजनीतिक कारणों से हमसे जिले का दर्जा छीना

भजनलाल सरकार के राजस्थान में 9 जिले और 3 संभागों को खत्म करने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती मिलने लगी है। गंगापुरसिटी के बाद अब नीमकाथाना से जिले का दर्जा वापस लेने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। नीमकाथाना से पूर्व विधायक रमेश चंद्र खंडेलवाल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करके कहा- गत 29 दिसंबर को अधिसूचना जारी कर नीमकाथाना से जिले का दर्जा छीन लिया गया। कुछ अन्य जिलों को राजनीतिक कारणों से बरकरार रख गया है। करीब तीन दशक से नीमकाथाना को जिला बनाने की मांग की जा रही थी। ऐसे में जिला रद्द करने की अधिसूचना को निरस्त किया जाए। जिला बनने से आई अपराध में कमी याचिकाकर्ता के वकील निखिल सैनी ने कहा कि राज्य सरकार ने रामलुभाया कमेटी की सिफारिशों और तय मापदंडों के आधार पर नीमकाथाना सहित अन्य जिले बनाए थे। उसके बाद यहां सरकारी कार्यालय और बस स्टैंड आदि के लिए जमीन आवंटित हो चुकी है। इसके साथ ही जिला कलेक्टर सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को भी जिले में नियुक्त किया गया। वहीं, कानून व्यवस्था पर भी प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया गया और इससे क्षेत्र में अपराध दर में भी कमी आई। गंगापुरसिटी के केस में हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा था जवाब
गंगापुरसिटी से जिले का दर्जा खत्म करने पर 13 जनवरी को हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा था। याचिका में कहा गया था कि सरकार का यह फैसला पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित है। गंगापुरसिटी को जिला बने डेढ़ साल हो गया है। यहां जिला कलेक्टर और एसपी ऑफिस खुलो गए हैं। सभी तरह का इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलप हो गया है। अब सरकार बदलने के साथ ही राजनीति से प्रेरित होकर जिले को खत्म करने का फैसला लिया गया है, जो जनहित में नहीं है। 28 दिसंबर को हुआ था फैसला 28 दिसंबर को कैबिनेट की बैठक में भजनलाल सरकार ने पिछली कांग्रेस सरकार में बने नए जिलों में से 9 जिलों और 3 संभागों को कैंसिल करने का फैसला लिया था। कानून मंत्री ने बताया था- इनकी उपयोगिता नहीं कानून मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा था कि चुनाव से पहले नए जिले और संभाग बनाए गए थे। इनकी उपयोगिता नहीं थी। वित्तीय संसाधन और जनसंख्या के पहलुओं को अनदेखा किया गया था। अनेक जिले ऐसे थे, जिनमें 6-7 तहसीलें नहीं थीं। दरअसल, जिलों को रिव्यू करने के लिए मंत्रियों की कमेटी बनाई गई थी। इस कमेटी ने भी ललित पंवार कमेटी की सिफारिश को आधार बनाकर मापदंडों पर खरा नहीं उतरने पर जिले कैंसिल करने की सिफारिश की थी। इसे कैबिनेट ने मंजूरी दे दी थी। गहलोत सरकार ने 17 नए जिले और 3 नए संभाग बनाए थे
गहलोत सरकार ने 17 नए जिले और 3 संभाग बनाए थे, इनमें जयपुर और जोधपुर के 2-2 टुकड़े किए गए थे। नए जिलों में अनूपगढ़, गंगापुर सिटी, कोटपूतली, बालोतरा, जयपुर ग्रामीण, खैरथल, ब्यावर, नीमकाथाना, डीग, जोधपुर ग्रामीण, फलोदी, डीडवाना, सलूंबर, दूदू, केकड़ी, सांचौर और शाहपुरा शामिल थे। बांसवाड़ा, पाली और सीकर को संभाग बनाया था। ये भी पढ़ें… राजस्थान के 12 जिलों की सीमाओं में बदलाव:सरकार ने जारी किया नोटिफिकेशन, जानिए किस में कौन सी तहसील और उपखंड शामिल होंगे कांग्रेस राज के 9 जिले और 3 संभाग खत्म करने को लेकर राजस्व विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी है। कैबिनेट ने शनिवार को ही गहलोत राज के जिले-संभाग खत्म करने का फैसला किया था। 31 दिसंबर तक ही जिले, तहसील, उपखंडों की सीमाओं को बदलने की छूट है। इसके बाद जनगणना की रोक लग जाएगी, इसे देखते हुए सरकार ने जिले, संभागों की सीमाओं में बदलाव का नोटिफिकेशन जारी किया है। (पूरी खबर पढ़ें)

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