नीमच में अक्षय क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी के खिलाफ न्याय की मांग कर रहे पीड़ितों का विरोध प्रदर्शन मंगलवार को आठवें दिन और उग्र हो गया। कलेक्टर कार्यालय परिसर में प्रदर्शनकारियों ने सहकारिता विभाग की सांकेतिक अर्थी निकालकर विभागीय लापरवाही के खिलाफ जोरदार नारे लगाए। इस दौरान उनकी अधिकारियों से तीखी बहस भी हुई। प्रदर्शन रोके जाने की बात पर पीड़ित सांकेतिक अर्थी के साथ परिसर में ही बैठ गए। उनका आरोप था कि कई वर्षों से शिकायतें करने के बावजूद सहकारिता विभाग कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा है, जिससे उनके आर्थिक और सामाजिक संकट बढ़ते जा रहे हैं। तीन प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया इसी बीच एसडीएम संजीव साहू मौके पर पहुंचे और प्रदर्शन की अनुमति पूछी। प्रदर्शनकारियों के पास कोई अनुमति पत्र नहीं होने पर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया। एसडीएम के निर्देश पर पुलिस ने तहसीलदार की मौजूदगी में प्रदर्शन समाप्त करवाया और हल्का बल प्रयोग करते हुए दो से तीन प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। सोसाइटी पर गंभीर आरोप पीड़ित विकास बांगा ने बताया कि अक्षय क्रेडिट सोसाइटी लंबे समय से लोगों का आर्थिक, मानसिक और सामाजिक शोषण कर रही है। उन्होंने कहा कि कई बार शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद सहकारिता विभाग ने न तो जांच की और न ही सोसाइटी की अवैध गतिविधियों पर रोक लगाई। पीड़ितों ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और अन्य उच्च अधिकारियों तक शिकायतें भेजी, लेकिन हर बार प्रकरण सहकारिता विभाग को भेजकर ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। विभाग का कहना था कि उसके पास आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। 800 पन्नों का दस्तावेज सौंपने के बाद भी कार्रवाई नहीं पीड़ितों के अनुसार, मजबूर होकर पिछले वर्ष 15 फरवरी को लगभग 800 पन्नों का विस्तृत दस्तावेज विभाग को दिया गया, जिसमें सोसाइटी की अनियमितताओं और पीड़ितों की शिकायतों का पूरा ब्यौरा था। इसके बावजूद दस महीने बीत जाने पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। धमकियां दे रहे प्रतिनिधि पीड़ितों ने यह भी आरोप लगाया कि सोसाइटी के प्रतिनिधि अब शिकायत वापस लेने के लिए धमकियां दे रहे हैं, जिससे परिवारों पर आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ गया है। इन्हीं परिस्थितियों के विरोध में शुरू हुआ शांतिपूर्ण धरना अब उग्र रूप ले चुका है।


