भास्कर न्यूज | बोड़ला गर्मी की दस्तक के साथ वन अग्नि का खतरा बढ़ने लगा है। इसे देखते हुए वनमंडल कबीरधाम ने बोड़ला ब्लॉक में नुक्कड़ नाटक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए जन-जागरूकता अभियान शुरू किया है। तीन दिनों में 10 गांवों में कार्यक्रम कर ग्रामीणों को समझाया गया कि जंगल में लगने वाली आग सिर्फ सूखी पत्तियां नहीं जलाती, बल्कि भविष्य का जंगल भी खत्म कर देती है। वन अधिकारियों ने ग्रामीणों को बताया कि आग लगने से बीज, छोटे पौधे, झाड़ियां, घास और मिट्टी में मौजूद जरूरी पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। सूखी पत्तियों के सड़ने से बनने वाले फंगस और बैक्टीरिया मिट्टी को उपजाऊ बनाते हैं, लेकिन आग इन प्राकृतिक तत्वों को खत्म कर देती है। आग के बाद मिट्टी की ऊपरी परत कठोर हो जाती है। इससे बारिश का पानी जमीन में नहीं समाता और भूजल स्तर गिरता है। वन अग्नि से जानवरों का प्राकृतिक आवास खत्म होता है। वे भोजन और सुरक्षा की तलाश में गांवों की ओर भटकते हैं, जिससे मानव-वन्यप्राणी संघर्ष बढ़ने का खतरा रहता है। 24 से 26 फरवरी 2026 के बीच प्रभुझोला, बेंदा, चोरभट्ठी, तेलीटोला, कनहारी, रोल, मुडवाही, बांधा, केसदा और छपरी (भोरमदेव) सहित 10 गांवों में कार्यक्रम आयोजित किए गए। हर गांव में करीब 200 से 250 ग्रामीणों की भागीदारी रही। अंचल के प्रसिद्ध कलाकार दल आस्था कला मंच कबीरधाम ने गीत, नाटक और संगीत के माध्यम से आग के दुष्परिणाम और बचाव के तरीके सरल भाषा में समझाए। मंच के संचालक गुरुदास मानिकपुरी ने बताया कि ग्रामीणों को समय पर सूचना देने और लापरवाही न करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। फायर लाइन, फायर वाचर और कंट्रोल रूम सक्रिय वनमंडल अधिकारी के निर्देश पर जंगलों में फायर लाइन की कटाई- सफाई, फायर वाचर्स की नियुक्ति और आग की सूचना मिलते ही तत्काल नियंत्रण की व्यवस्था की जा रही है। बेहतर समन्वय के लिए कवर्धा वनमंडल कार्यालय में फॉरेस्ट फायर कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। किसी भी स्थान पर आग लगने की सूचना तत्काल 07741-232230 पर देने की अपील की गई है। लोगों को जानकारी देने अपील की गई है।


