भास्कर न्यूज | बोड़ला नगर के समीप ग्राम सुकवापारा में 20 से 28 फरवरी तक चला पर्वत दान और श्रीलक्ष्मी नारायण महायज्ञ शनिवार को वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूर्णाहुति पर पहुंचा। नौ दिनों तक चले इस धार्मिक अनुष्ठान ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया। श्रीराम कथा रूपी मंदाकिनी का भी विधिवत विराम हुआ। इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता रही 350 क्विंटल (करीब 25 गाड़ा) धान से निर्मित भव्य धान्य पर्वत, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 9 लाख रुपए बताई गई। 28 फरवरी को इस धान्य पर्वत का दान विधिपूर्वक किया गया। उपाचार्य धर्मेंद्र शास्त्री ने बताया कि श्रीलक्ष्मी नारायण महायज्ञ में परिक्रमा का विशेष महत्व है। शास्त्रों के अनुसार यज्ञ स्वयं विष्णु स्वरूप है, और जहां यज्ञ होता है, वहां परिक्रमा से पापों का क्षय होता है। 350 क्विंटल धान से निर्मित पर्वत को तीन स्वरूपों में स्थापित किया गया था। इसमें भगवान विष्णु, भगवान शंकर और सूर्यनारायण की प्रतिमाएं विराजमान थीं। धान्य पर्वत का प्रतिदिन पूजन होता था। यज्ञ के दौरान इसमें विभिन्न द्रव्य, रत्न तथा सोना-चांदी की वस्तुएं भी अर्पित की गईं, जिन्हें पूर्णाहुति के साथ दान कर दिया गया। पूरे आयोजन के दौरान स्वामी धीरेंद्राचार्य ने प्रतिदिन श्रीराम कथा का वाचन कर श्रद्धालुओं को अमृत पान कराया। धर्म रामभक्ति, जीवन मूल्यों पर आधारित प्रवचनों ने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। आचार्यों की अहम भूमिका इस महायज्ञ में मुख्य यजमान के रूप में सपत्निक आशीष शास्त्री ने सहभागिता निभाई। यज्ञाचार्य पंडित प्रकाश तिवारी, उपाचार्य धर्मेंद्र शास्त्री, उद्देश्य शास्त्री, पंडित अमित तिवारी, आचार्य गोपी तिवारी और शिवकांत तिवारी ने वैदिक विधि-विधान से अनुष्ठान को संपन्न कराया। आध्यात्मिक माहौल रहा नौ दिनों तक चले इस महायज्ञ और श्रीराम कथा से सुकवापारा ही नहीं, आसपास के गांवों में भी भक्ति की लहर रही। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस तरह के अनुष्ठान सामाजिक समरसता, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करते हैं। कथा पंडाल में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।


