बूंदी जिले में पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल और कांग्रेस नेता धीरज गुर्जर के तीखे बयानों के बाद पूर्व मंत्री अशोक चांदना ने भी पलटवार किया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की टिप्पणी ने भी हाड़ौती की सियासत को गरमा दिया है।
राज बदलने के बाद छिपने के लिए बिल तलाश कर रखना- गुंजल 24 जनवरी को गुर्जर समाज के एक कार्यक्रम में पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल ने सरकार से जुड़े लोगों को चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “किसी को मुगालता नहीं होना चाहिए। राज बदलने के बाद छिपने के लिए बिल तलाश कर रखना।” गुंजल ने यह भी कहा कि जो लोग उनकी कौम के लोगों की रोजी-रोटी पर ठोकर मार रहे हैं, उन्हें व्यवस्था बदलने पर भय का अंदाजा हो जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह तलवे चाटकर राजनीति नहीं करते। उन्होंने कहा कि जब हमारा राज आएगा, अपने अपमान का चुन-चुन कर बदला लेंगे। उन्होंने सरकारी लोगों को चुनौती देते हुए कहा कि जिस दिन सरकार के पद से हट जाओ, साधारण आदमी बनकर हमें चुनौती देने की कोशिश करना नानी याद दिला देगें।
देवनारायण की सौगंध… गुंजल आवाज देगा तो खड़ा मिलूंगाः धीरज गुर्जर इसी कार्यक्रम में कांग्रेस नेता धीरज गुर्जर ने भी तीखे बयान दिए। आप हाड़ौती के नेता हो, बड़े भाई हो, भगवान देवनारायण की सौगंध… अगर गुंजल आवाज देगा तो धीरज गुर्जर पूरे खानदान के साथ खड़ा हो जाएगा। हमने चप्पलें उठा ली होती तो सरकार गुंजल का मकान नहीं तोड़ती और धीरज गुर्जर की मां को सस्पेंड नहीं करती। गुर्जर ने चुनौती देते हुए कहा, “किसी की मां ने दूध पिलाया हो तो जरूरत पड़ने पर रात 2 बजे भी जान देने के लिए खड़ा मिलूंगा।” उन्होंने आगे कहा कि जिस दिन बात फंसेगी, वह ‘नानी याद दिला देंगे’ और किसी भी वक्त लड़ाई के लिए तैयार रहने को कहा। उन्होंने कुछ लोगों को अपने ओहदे से त्यागपत्र देकर हेकड़ी दिखाने की चुनौती भी दी।
आरोपों से राजनीति नहीं चलती, धरातल होता तो चुनाव जीत लेतेः बिरला 25 जनवरी को रामाश्रय के शिलान्यास समारोह में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी किसी का नाम लिए बिना राजनीतिक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि ऐसे नहीं होता, जब आपको समाज ने चुनकर भेजा है तो एक जिम्मेदारी निभानी चाहिए। चुनावी दंगल अलग होता है, चुनाव जनता के विश्वास पर लड़ा जाता है। जनता भरोसे पर वोट देती है। झूठे तथ्यों और गलत आरोपों से ज्यादा दिन राजनीति चलने वाली नहीं होती। उनका धरातल नहीं होता। अगर धरातल होता तो चुनाव ही जीत जाते। बिना तर्क की बात करते हैं। जिन्होंने कभी जिंदगी में एक गरीब को दो टाइम की रोटी का इंतजाम और एक मरीज का इलाज नहीं कराया हो, उसको क्या राजनीति में लोग समझेंगे। कई लोग ऐसे होते हैं, जो बहुत जोर-जोर से भाषण देते हैं, जमीन आसमान एक कर देते हैं, लेकिन राजनीतिक जीवन में संवेदना नाम की एक चीज नहीं होती।
अब कोटा, भीलवाड़ा, बारां तक के रोजड़े आने लगे हैं- चांदना 26 जनवरी गुर्जर समाज के अन्य कार्यक्रम में चांदना ने कहा कि आपके यहां के बच्चे शिक्षा में आगे बढ़ रहे हैं। शिक्षित बच्चों की फसलें बढ़िया होने लगी हैं तो रोजड़े भी बहुत आने लग गए, देखो फसल बढ़िया होती है तो रोजड़े आते ही हैं। पहले देवली के रोजड़े आते थे, अब कोटा, भीलवाड़ा, बारां तक के रोजड़े आने लग गए। फिक्र मत करो। आपको सिर्फ अपने बच्चों पर ध्यान देना है। चांदना ने कहा कि यह सोचना है कि उनकी और समाज की तरक्की कैसे हो। इस मंच से ऐसे भाषण हुए, हथियार उठा लो… लाठी उठा लो… मैं कहूंगा बिल्कुल मत उठाओ, सब काम हो जाएगा। उठाना है तो, कलम उठाओ। और यदि हथियार ही उठाना है तो देश के लिए उठाओ, आर्मी में जाओ। शिक्षा में प्रतिस्पद्धां करो। मेरी चिंता मत करो…। यह भाषण देते रह जाएंगे, मैं बोट लेकर जीत जाऊंगा। हिंडौली-नैनवां में आज तक कोई दूसरी बार नहीं जीता और आप लोगों की कृपा से तीसरी बार जीता हूं, हर बार 15 हजार का मार्जिन बढ़ा है। मैं इनकी गेंद बना दूंगा चांदना ने कहा कि भीड़ की चिंता मत करो। यह सब घूमते रहेंगे, मैं इनकी गेंद बना दूंगा, इधर से उधर फेंक दूंगा। राजनीतिक चालों में मत फंसी, सर्व समाज से प्रेम भाव से रहो, आजकल कई लोग प्रयास करते हैं कि कई कैंपेन चल रहे हैं कि कैसे गुर्जर मीणा लड़ें। यह समाज एक या दो व्यक्ति से नहीं चलते। मदारी को देखने के लिए भीड़ बहुत आती है, लेकिन उसको सरपंच का चुनाव लड़ा दो तो लोग उसे वोट नहीं देंगे।
बीसलपुर में बजरी घोटाला हुआः नरेश
27 जनवरी को भगतसिंह सेना की नुक्कड़ सभा में नरेश मीणा ने कहा कि रात में बनास नदी में बड़ी मशीनों और डंपरों की लाइटें चमकती हैं। तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने बीसलपुर से गाद निकालकर किसानों को मुफ्त देने की घोषणा थी, लेकिन हजारों करोड़ की रेत निकाली जा रही है। यदि में समझौता कर लेता तो हजारों करोड़ रुपए कमा सकता था। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, हाड़ौती क्षेत्र में कांग्रेस की नई खेमेबंदी के बीच यह जुबानी जंग की शुरुआत है। आने वाले दिनों में अंचल की राजनीति में और अधिक तल्खी देखने को मिल सकती है।


