अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव और गीता जयंती के उपलक्ष्य में सोमवार को जबलपुर की नेताजी सुभाष चंद्र बोस केंद्रीय जेल में एक विशेष आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जेल के बंदियों ने सामूहिक रूप से श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ किया और उसके उपदेशों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। जेलर मदन कमलेश ने बताया कि इस्कॉन समिति के सदस्यों ने जेल पहुंचकर बंदियों को गीता के महत्व और जीवन पर उसके सकारात्मक प्रभावों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पिछले एक वर्ष से हर गुरुवार जेल में नियमित गीता पाठ कराया जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप कैदियों के व्यवहार में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। कैदियों ने लिया संकल्प जेल प्रशासन का कहना है कि आध्यात्मिक अध्ययन, विशेषकर गीता जैसे ग्रंथों का पठन, बंदियों में मानसिक शांति, आत्म-सुधार और सकारात्मक सोच को बढ़ावा दे रहा है। कार्यक्रम में कैदियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और गीता के संदेशों को अपने जीवन में लागू करने का संकल्प लिया।


