नेता प्रतिपक्ष के बिना ही चला सदन:भाजपा विधायक नहीं चुन पाए अपना नेता

छठी झारखंड विधानसभा के पहले बजट सत्र में सोमवार को प्रतिपक्ष के नेता की सीट खाली रही। भाजपा विधायक दल के नेता के बिना ही सदन में बैठी। भाजपा सदन में मुख्य विरोधी दल है, इसलिए उसके विधायक दल के नेता को ही नेता प्रतिपक्ष की मान्यता मिलेगी। इस स्थिति में जब तक भाजपा विधायक दल के नेता का चुनाव नहीं कर लेती है, तब तक सदन को प्रतिपक्ष का नेता नहीं मिल पाएगा। शुरू से ही भाजपा के रुख को देखकर जो कयास लगाया जा रहा थे। उसके अनुरूप भाजपा के विधायकों ने विधायक दल के नेता के बिना ही सदन की कार्यवाही में हिस्सा लिया। सबसे बड़ी बात तो यह है कि भाजपा ने एक ओर जहां विधायक दल के नेता का चुनाव नहीं किया है। वहीं, मुख्य सचेतक और सचेतक के पद भी भी किसी विधायक को जिम्मेदारी नहीं दी है। इसकी वजह से भाजपा का मुख्य सचेतक और सचेतक भी सदन में नहीं है। अब भाजपा कब तक विधायक दल के नेता, मुख्य सचेतक और सचेतक का चुनाव करेगी यह तय नहीं है। यह बजट सत्र के दौरान ही होगा या बाद में यह तय नहीं है। वैसे स्पीकर पहले ही यह कह चुके हैं कि प्रतिपक्ष का नेता होना सदन के लिए आवश्यक है। सोमवार को सदन में सभी पार्टी के नेताओं को दो सत्रों के बीच दिवंगत हुए लोगों के प्रति जब शोक प्रकाश करने का अवसर दिया गया। तब भाजपा से बाबूलाल मरांडी को यह जिम्मेदारी मिली।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *