नेता प्रतिपक्ष ने सीएम के विदेश यात्रा पर उठाए सवाल:बाबूलाल मरांडी ने कहा-उद्योग मंत्री की जगह कल्पना सोरेन क्यों शामिल हो रही हैं

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन टीम के साथ शुक्रवार को विदेश दौरे पर रवाना होने वाले हैं। टीम 27 अप्रैल तक स्वीडन और स्पेन के दौरे पर रहेगी। वहीं, इससे पहले ही नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस विदेश यात्रा पर सवाल उठा दिया है। बाबूलाल मरांडी ने अपने X हेंडल पर लिखा है कि हेमंत जी, यदि यह यात्रा सरकारी है, तो उद्योग मंत्री की जगह कल्पना सोरेन किस हैसियत से शामिल हो रहीं हैं? यदि यह निजी यात्रा है, तो फिर सरकारी खजाने से खर्च कर अधिकारियों की फौज क्यों भेजी जा रही है? इधर, उद्योग विभाग के अफसरों का कहना है कि स्वीडन और स्पेन के उद्यमियों को झारखंड में औद्योगिक निवेश के लिए आमंत्रित किया जाएगा। झारखंड में कई तरह खनिज भंडार है। जमशेदपुर में वाहन उद्योग और खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में काफी संभावनाएं है। ईवी, पवन और सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भी उद्यमियों को निवेश के लिए आकर्षित किया जाएगा। क्या है दौरे का उद्देश्य
राज्य में निवेश को आकर्षित करना। हरित ऊर्जा, स्मार्ट सिटी, टेक्नोलॉजी और इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट से जुड़ी संभावनाओं की तलाश करना। दोनों देशों के इनोवेशन, स्किल डेवलपमेंट व इंफ्रास्ट्रक्चर से सीखना। टीम में कौन-कौन शामिल विधायक कल्पना सोरेन, मुख्य सचिव अलका तिवारी, सीएम के अपर मुख्य सचिव अविनाश कुमार, रिटायर आईएफएस और टास्क फोर्स सस्टेनेबल जस्ट ट्रांजिशन के अध्यक्ष एके रस्तोगी, उद्योग सचिव अरवा राजकमल, जेएसएमडीसी के एमडी राहुल कुमार सिन्हा, निदेशक उद्योग सुशांत गौरव, एमडी जेआईआईडीसीओ वरुण रंजन, संयुक्त निदेशक उद्योग प्रणव कुमार पाल और सीएम के निजी सुरक्षा अधिकारी अजय कुमार सिंह शामिल हैं। उद्योग मंत्री को क्यों नहीं साथ ले जाया जा रहा: बाबूलाल
वहीं, शुक्रवार को ही बाबूलाल मरांडी ने अपने X हेंडल पर लिखा- आज प्रदेश में कानून व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है, दिनदहाड़े हत्याएं हो रही हैं, बिजली संकट गहराया हुआ है… और इन सबके बीच मुख्यमंत्री अपनी विधायक पत्नी को साथ लेकर एक बड़े सरकारी प्रतिनिधिमंडल के साथ स्वीडन और स्पेन की यात्रा पर रवाना हो रहे हैं। यदि इस यात्रा का उद्देश्य विदेशी निवेश लाना है, तो सबसे बड़ा सवाल है कि उद्योग मंत्री को क्यों नहीं साथ ले जाया जा रहा है? उद्योग विभाग के सचिव और निदेशक तो इस प्रतिनिधिमंडल में शामिल हैं, लेकिन उद्योग मंत्री का नाम सूची से नदारद है। क्या निवेश की बातचीत में मंत्री की कोई भूमिका नहीं? ऐसा पहली बार नहीं हो रहा। सुना है कि कोलकाता में हुई एक महत्वपूर्ण निवेश बैठक में भी उद्योग मंत्री को अपमानित कर अंतिम समय पर शामिल होने से रोक दिया गया था और उनके स्थान पर हेमंत सोरेन अपनी पत्नी को साथ ले गए थे। ‘यदि यह निजी यात्रा है, तो फिर सरकारी खजाने से खर्च कर अधिकारियों की फौज क्यों भेजी जा रही है?’ हेमंत जी, यदि यह यात्रा सरकारी है, तो उद्योग मंत्री की जगह कल्पना सोरेन किस हैसियत से शामिल हो रहीं हैं? यदि यह निजी यात्रा है, तो फिर सरकारी खजाने से खर्च कर अधिकारियों की फौज क्यों भेजी जा रही है? चौंकाने वाली बात यह भी है कि प्रतिनिधिमंडल में एक ऐसे सेवानिवृत्त IFS अधिकारी को भी शामिल किया गया है जिनकी ‘ख्याति’ से पूरा प्रदेश परिचित है। हेमंत सोरेन सरकार में सहयोगी दलों के मंत्रियों को अपमानित करना अब एक परंपरा बनता जा रहा है। सारे विभागों से निर्णय लेने की शक्ति अघोषित तौर पर मुख्यमंत्री जी के विधायक पत्नी को दी जा चुकी है।

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