नेपाल में लैंडस्लाइड से दो दिन में 43 की मौत:5 लापता; पूर्वी नेपाल में सबसे ज्यादा नुकसान; सेना हेलिकॉप्टर से रेस्क्यू में जुटी

नेपाल में शुक्रवार से हो रही भारी बारिश के बाद लैंडस्लाइड और बाढ़ से दो दिन में 43 लोगों की मौत हो गई, जबकि 5 लापता हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सबसे ज्यादा नुकसान पूर्वी नेपाल के इलाम जिले में हुआ, जहां लैंडस्लाइड में 37 लोगों की मौत हो गई। लोकल जिला अधिकारी सुनिता नेपाल ने कहा- ‘रात भर हुई मूसलाधार बारिश ने लैंडस्लाइड को ट्रिगर किया, जिससे भारी नुकसान हुआ।’ कई इलाकों में सड़कें जाम होने की वजह से रेस्क्यू में मुश्किल आ रही हैं। बचावकर्मी पैदल ही प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। राजधानी काठमांडू में भी हालात खतरनाक बने हुए हैं। नदियों का जलस्तर बढ़ने से कई घर और बस्तियां डूब गईं हैं। सिक्योरिटी फोर्सेज हेलिकॉप्टर और मोटरबोट से रेस्क्यू में जुटी हैं। बाढ़ से तबाही की तस्वीरें…
बारिश के लंबे मौसम से ज्यादा नुकसान हुआ नेपाल में हर साल जून से सितंबर तक मानसून की बारिश होती है, लेकिन इस बार बारिश का मौसम देर तक चला, जिससे नुकसान ज्यादा हो रहा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं बढ़ गई हैं। इनका समय और तीव्रता भी पहले से ज्यादा खतरनाक हो गई है। नेपाल जैसे पहाड़ी देशों में यह खतरा और भी बड़ा है। सड़कें बंद होने से सैकड़ों यात्री फंसे भूस्खलन की वजह से कई मुख्य सड़कें बंद हो गई हैं, जिसकी वजह से ट्रैफिक पूरी तरह ठप है। दशैं त्योहार के बाद घर लौट रहे सैकड़ों यात्री फंस गए हैं। खराब मौसम ने हवाई यात्रा को भी प्रभावित किया है, जिससे कई उड़ानें रद्द हो गईं। स्थानीय प्रशासन लोगों को सुरक्षित जगह पर शिफ्ट कर रहा हैं। भोजन, पानी और दवाइयां बांटने का काम भी जारी है, लेकिन बंद सड़कें और खराब मौसम इस काम को मुश्किल बना रहे हैं। लोग बोले- हमारे घरों में पानी घुस आया, अब कुछ नहीं बचा एक महिला ने मीडिया को बताया कि रात में अचानक पानी और मलबा हमारे घरों में घुस आया। कई लोगों ने अपना सब कुछ खो दिया। काठमांडू की एक अन्य महिला ने कहा- हमारे घर में कमर तक पानी भर गया। अब हमारे पास कुछ नहीं बचा। नेपाल सरकार ने लोगों से नदियों और पहाड़ी इलाकों के पास सावधानी बरतने को कहा है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद मांगी जा रही है। एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि अगर जलवायु परिवर्तन रोकने के लिए जल्दी कदम नहीं उठाए, तो दक्षिण एशिया में ऐसी आपदाएं और बढ़ेंगी।

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