नोएडा में रिटायर्ड पीसीएस की कथित पत्नी पर एक्शन:प्राधिकरण पहुंची असली पत्नी, पेश के दस्तावेज, प्राधिकरण ने प्रॉपर्टी ट्रांसफर किया निरस्त

रिटायर्ड पीसीएस हरी शंकर मिश्रा की मौत के बाद उनकी संपत्ति को लेकर 30 साल की एक महिला ने शादी सर्टिफिकेट लगाकर नोएडा प्राधिकरण से एक प्लाट अपने नाम करवा लिया। इस प्रकरण में आज रिटायर्ड पीसीएस की असली पत्नी दस्तावेज के साथ प्राधिकरण पहुंची। उन्होंने एसीईओ के समक्ष रिटायर्ड पीसीएस की पत्नी होने से लेकर प्रॉपर्टी के सभी दस्तावेज प्रस्तुत किए। साथ ही उक्त महिला के जालसाज़ होने का प्रूफ भी दिया। जिसके बाद प्राधिकरण ने रिटायर्ड पीसीएस की पत्नी की दावा करने वाली शिबा शिखा के नाम ट्रांसफर की गई प्रॉपर्टी को निरस्त कर दिया है। इस मामले में अब पीड़ित परिवार कोर्ट जाने की तैयारी कर रहा है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि ये सब एक षड्यंत्र के तहत कराया जा रहा है। जिसके लिए अब हम कोर्ट तक जाएंगे। दरअसल रिटायर्ड पीसीएस की मौत 11 जुलाई 2024 को हो गई। इसके बाद शिबा ने शादी का सर्टिफिकेट और रिटायर्ड पीसीएस का डेथ सर्टिफिकेट लगाकर प्राधिकरण में प्रॉपर्टी ट्रांसफर करने का आवेदन किया। दो प्रॉपर्टी के लिए किया था आवेदन ये आवेदन दो प्रॉपर्टी के लिए किया गया। जिसमें एक प्रॉपर्टी प्राधिकरण ने शिबा के नाम कर दी। जानकारी मिलते ही हरी शंकर की असली पत्नी दस्तावेजों के साथ नोएडा प्राधिकरण पहुंची। उन्होंने दस्तावेज प्रस्तुत किए और जिसमें उन्होंने बताया कि शिबा ने जो दस्तावेज प्रस्तुत किए वो पूरी तरह से फर्जी है। उसने शादी के दो सर्टिफिकेट बनवाए। एक 2019 का दूसरा 2024 का। साथ ही मुख्य दस्तावेजों को एडिट करवाकर प्राधिकरण में जमा कराया गया। ऐसे में प्राधिकरण एसीईओ वंदना त्रिपाठी ने मामले को संज्ञान में लेते हुए तत्काल एक्शन लिया। और शिबा के नाम ट्रांसफर की गई प्रॉपर्टी को निरस्त कर दिया। बेटी होने का दावा किया पेश
वहीं एक अन्य महिला ने प्राधिकरण के सीईओ और अन्य अधिकारियों को शिकायत पत्र देकर मर चुके रिटायर पीसीएस अधिकारी की बेटी होने का दावा किया। ऐसे में आज पहुंचे लोगों ने पीसीएस की असली बेटी के दस्तावेज भी प्रस्तुत किए। बता दे ये पूरा मामला ही प्रॉपर्टी से जुड़ा है। पीसीएस की नोएडा में करीब 11 संपत्तियां है। इसके अलावा लखनऊ में भी इनकी संपत्तियां है। पार्टनरशिप में चल रहा था काम
दरअसल जिस संपत्ति का ट्रांसफर शीबा के नाम किया गया। उस पर पर पीजी संचालित किया जा रहा है। ये पीजी एक अन्य व्यक्ति के साथ जॉइंट में था। फिलहाल इस पूरे प्रकरण में संपत्तियों की ट्रांसफर पर रोक लगी है।

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