वित्तीय वर्ष 2025-26 के नौ माह बीत चुके हैं, लेकिन योजना एवं विकास के लिए तय पैसों में 46 प्रतिशत राशि ही खर्च हो सकी है। 31 दिसंबर तक तीसरी तिमाही में योजना बजट के करीब 42,200 करोड़ रुपए ही खर्च हुए हैं। यह राशि योजना बजट का करीब 46 प्रतिशत है। चौथी तिमाही में तीन माह में 54% खर्च की चुनौती है। चालू वित्तीय वर्ष की पहला तिमाही (अप्रैल से जून 2025) में योजना बजट की 15 प्रतिशत से भी कम राशि खर्च हुई थी। वहीं, दूसरी तिमाही में करीब 19 प्रतिशत राशि खर्च हुई। तीसरी तिमाही तक 46 प्रतिशत तक ही खर्च हो सका है। बता दें कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए कुल बजट आकार 1.45 लाख 400 करोड़ रुपए का है। इसी में योजना बजट 91741.53 करोड़ रुपए है। केंद्रीय योजनाओं से जुड़ी कुल राशि 17073.61 करोड़ रुपए है। वहीं, शत-प्रतिशत केंद्रीय योजना की राशि 2908.98 करोड़ रुपए है। योजनाओं के लिए केंद्रांश की राशि 14164.63 करोड़ रुपए है। राजस्व आय का लक्ष्य 125153 करोड़ रुपए, अब तक 76000 करोड़ ही हो पाया जमा 31 मार्च तक 50 हजार करोड़ रुपए बतौर संसाधन जुटाने की चुनौती
चालू वित्तीय वर्ष के नौ माह में में राजस्व संसाधन लक्ष्य का करीब 60 प्रतिशत की ही वसूली है। शेष बचे तीन माह में 40% वसूली की चुनौती सरकार के सामने है। राजस्व वसूली का लक्ष्य पूरा करने के लिए 31 मार्च 2026 तक सरकार को करीब 50 हजार करोड़ रुपए बतौर संसाधन जुटाना होगा। बजट के मुताबिक, चालू वित्तीय वर्ष में राजस्व आय का लक्ष्य 12,5153 करोड़ रुपए है। इसके विरुद्ध अब तक 76,000 करोड़ रुपए ही जमा हो पाया है।


