रिम्स प्रबंधन अस्पताल की अपनी दवा दुकान खोलने जा रहा है, जहां जेनरिक के साथ-साथ ब्रांडेड दवाएं भी 60 से 70 प्रतिशत तक सस्ती दर पर उपलब्ध कराई जाएंगी। नई दवा दुकान ओल्ड मोर्चरी भवन में यानी जन औषधि केंद्र के पीछे डॉक्टर्स पार्किंग के बगल में खोली जाएगी। सोमवार को रिम्स के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. हिरेन बिरूआ, अपर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. शैलेश त्रिपाठी, अपाधीक्षक व अन्य प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण किया और आवश्यक सुविधाओं को लेकर आपसी विमर्श किया। प्रबंधन का मानना है कि यह स्थान मरीजों और उनके परिजनों की पहुंच में रहेगा और यहां दवा वितरण को सुचारू रूप से संचालित किया जा सकेगा। वर्तमान में रिम्स के अधिकांश डॉक्टर ब्रांडेड दवाएं लिखते हैं। ऐसे में बाहर की मेडिकल दुकानों से दवा खरीदने पर मरीजों की जेब पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी मरीज को रोजाना 5 दिन तक एंटीबायोटिक, पेन किलर और गैस की दवा लेनी हो, तो बाजार में ब्रांडेड दवाओं पर करीब 800 से 1000 रुपये तक खर्च हो जाता है। वहीं यही दवाएं अगर 60-70 प्रतिशत सस्ती मिलें, तो मरीज का खर्च घटकर 300 से 400 रुपए तक रह जाएगा। एक औसत मरीज को इलाज के दौरान दवाओं पर ही हर महीने 8 से 10 हजार रुपए तक खर्च करने पड़ते हैं, जो गरीब और मध्यम वर्ग के लिए बड़ी समस्या है। रिम्स की इस फार्मेसी में सिर्फ दवाएं ही नहीं, बल्कि जरूरी सर्जिकल आइटम भी उपलब्ध रहेंगे। इससे मरीजों को बाहर भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। कैथेटर, सिरिंज, ड्रेसिंग मटेरियल और अन्य आवश्यक मेडिकल सामान भी यहीं उचित दर पर मिल सकेगा। आगे क्या होगा और बेहतर: फिलहाल मरीज अमृत फार्मेसी और जन औषधि केंद्र से दवा ले रहे हैं, लेकिन कई बार सभी जरूरी दवाएं वहां उपलब्ध नहीं होतीं। ऐसे में मरीजों को निजी मेडिकल दुकानों का रुख करना पड़ता है, जहां कीमतें अधिक होती हैं। रिम्स की अपनी दवा दुकान खुलने से मरीजों के पास एक अतिरिक्त विकल्प होगा, जिससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और दवाओं की कीमतें नियंत्रित रहेंगी।


