ग्राम पंचायतों की एआई आधारित बैठकों में राजस्थान का रिकॉर्ड ठीक नहीं है। केंद्र सरकार की यह एक ऐसी एआई-संचालित तकनीक है जो ग्राम सभा की बैठकों के ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग से सीधे सिस्टम में लिखित कार्यवाही तैयार की जा सकती है। इसमें पूरे देश में राजस्थान 14वें स्थान पर उपस्थिति दर्ज करवा रहा है। 33 जिलों के आंकड़ों में 7 जिले तो ऐसे हैं, जहां एक भी पंचायत में इस पहल को नहीं अपनाया गया है। केंद्र सरकार ने 15 अगस्त से एआई आधारित पहल ‘सभासार’ के रूप में सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के लिए इसे उपलब्ध कराया था। पायलट प्रोजेक्ट के तहत त्रिपुरा की सभी ग्राम पंचायतों को विशेष ग्राम सभाओं के लिए इसका उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया गया था। दिसंबर महीने तक देश भर की 92376 ग्राम पंचायतों ने स्वचालित बैठक सारांश के लिए सभासार का उपयोग किया है। इसमें उत्तर प्रदेश की 57 हजार पंचायतों में से 27 हजार से ज्यादा पंचायतों ने इसे लागू कर दिया है। तमिलनाडु में 12 हजार से ज्यादा पंचायतों में से 11874 पंचायतों ने इस एआई टूल का उपयोग किया है। बिहार 5988, छत्तीसगढ़ 8707 और ओड़िशा 6239 जैसे राज्य भी इस तकनीक को अपनाने में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
जबकि पश्चिम बंगाल 60 और मध्य प्रदेश 313 जैसे बड़े राज्यों में अभी इसकी रफ़्तार धीमी है। वहीं, राजस्थान की कुल 11206 पंचायतों में से 1500 पंचायतों ने अब तक इस एआई तकनीक का उपयोग कर बैठक की कार्यवाही दर्ज की है। इनमें उदयपुर जिला सबसे आगे है। जहां 650 में से 640 पंचायतों ने इस पहल को सफलतापूर्वक लागू किया है। इसी तरह बांसवाड़ा जिले में 417 पंचायतों में से 267 पंचायतों ने तकनीक का लाभ उठाया है। बीकानेर में 364 में से 218 पंचायतें एआई का उपयोग कर रही है। हनुमानगढ़ 184, राजसमंद 184, झालावाड़ 121, जैसलमेर 110, अलवर 84, धौलपुर 54, डूंगरपुर 61, अजमेर 30, सिरोही 27, चित्तौड़गढ़ 26, बाड़मेर 16, प्रतापगढ़ 16, झुंझुनूं 14 व नागौर की 65 पंचायतों ने इस तकनीक को अपनाया है। 9 जिलों में दस-दस पंचायतों ने भी नहीं अपनाई एआई प्रदेश के 9 जिलों में पंचायतों का आंकड़ा दस–दस भी नहीं है। इनमें दौसा की 4, भरतपुर की 6, जोधपुर की 5, भीलवाड़ा की 2, बूंदी की 1, करौली की 1, पाली की 1, सवाई माधोपुर की 1 और सीकर की 1 पंचायत शामिल है। जबकि जयपुर, बारां, चूरू, श्रीगंगानगर, जालोर, कोटा और टोंक जैसे जिलों में अभी एक भी पंचायत ने इस पोर्टल पर डेटा दर्ज नहीं किया है। जबकि इन जिलों में 200 से लेकर 600 तक ग्राम पंचायतें हैं।


