डीग जिले के मेवात क्षेत्र में पुलिस के ऑपरेशन एंटीवायरस के खौफ के चलते अब मेवात में पंचायत आयोजित कर साइबर ठगी गो तस्करी सहित अन्य अपराध नहीं करने की महिम चल गई है। साइबर ठगी से जुड़े हुए लोग फर्जी सिम एवं मोबाइल का अब उपयोग नहीं करेंगे। अपराध से जुड़े तीनों गांव के लोग फर्जी सिम और मोबाइल को जला देंगे तथा पुराने मुकदमों में गांव के जो लोग वंचित हैं उन्हें पड़कर पुलिस के सुपुर्द किया जाएगा। अगर भविष्य में कोई व्यक्ति ठगी सहित अन्य अपराध करता है तो कमेटी पुलिस के सुपुर्द करेगी। पंचायत के फैसले के बाद सभी लोगों ने हाथ उठाकर कसम खाकर थाना अधिकारी मनीष शर्मा को विश्वास दिलाया गया। भरतपुर आईजी राहुल प्रकाश के द्वारा चलाई जा रही महिम का प्रभाव अब मेवा क्षेत्र में दिखने लग गया है गत दिनों लाडला का के लोगों ने पंचायत कर फैसला लिया उसके बाद अब साइबर ठगी में प्रसिद्ध पालड़ी गांव के लोग आगे आए हैं। डीग जिले के कामां मेवात के पालड़ी, सतवास, और कनवाड़ी गांव के लगभग 150 शिक्षित एवं जागरूक लोगों ने सतवास के सरपंच बृजलाल फौजी की अध्यक्षता में पंचायत आयोजित की गई। पंचायत में सहमति बनने के बाद कामां थाना प्रभारी मनीष शर्मा को बुलाकर पंचायत में लिए गए फैसले से अवगत कराते हुए कहा कि इस पंचायत का मुख्य उद्देश्य साइबर ठगी और गौ तस्करी को रोकने को लेकर ग्रामीण पुलिस का पूरा सहयोग करेंगे। तीन गांवों के 100 से अधिक साइबर ठग कर चुके करोड़ों रुपए की ठगी पंचायत में निर्णय लिया है कि साइबर ठगी करने वाले आरोपियों की जानकारी देने पर 21 हजार का इनाम,गौ तस्करी या गोकशी करने पर 2 लाख का जुर्माना,साइबर ठगी करते हुए पकड़े जाने पर 51 हजार का जुर्माना सामाजिक स्तर पर लगाया जाएगा । एक 15 सदस्यों की निगरानी कमेटी बनाई गई, जो साइबर ठगी और गौ तस्करी करने वाले लोगों पर निगरानी रखेगी और उनकी सूचना पुलिस तक पहुंचाएगी।
उल्लेखनीय है कि तीन गांव के 100 लोग ठगी की वारदातों में शामिल थे। जिन पर 15 से ज्यादा मामले दर्ज थे। जिनमें से 45 ठग गिरफ्तार हो चुके हैं। वहीं मुंबई, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, गुजरात, महाराष्ट्र की पुलिस तलाश में लगी हुई हैं। यूपी सीमा से सटे हुए तीनों गांव तीनों गांव उत्तर प्रदेश सीमा से लगे हुए हैं जो अपराध में सबसे आगे थे मेवात क्षेत्र में पालड़ी गांव साइबर ठगी के नाम से प्रसिद्ध है जहां अन्य राज्यों की पुलिस प्रतिदिन आती है। “मेवात में तीन गांवों के लोगों को साइबर ठगी और गौ तस्करी के खिलाफ एकजुट होने के लिए पंचायत में महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अगर किसी भी व्यक्ति का नाम अपराधों में आता है, तो गांव के लोग ही उसे पुलिस के हवाले करेंगे। ठग की मोबाइल लोकेशन गांव में मिलती है, तो ग्रामीण उसे पकड़कर पुलिस को सौंपेंगे।” राजेश मीणा, एसपी डीग।


