पंजाब रोडवेज की नई बसों की खरीद ठप, पुरानी हो रहीं कंडम

वारिस मलिक | जालंधर सूबे में पंजाब रोडवेज की बदहाल स्थिति एक बार फिर सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार पंजाब रोडवेज के पास कुल मिलाकर करीब 2100 बसों के परमिट हैं, लेकिन रोडवेज और पनबस को मिलाकर महज 1465 बसें ही फ्लीट में शामिल है। करीब 600 से ज्यादा बसों की सीधी कमी, जिसका खामियाजा रोजाना यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। जबकि 1465 बसों में से भी ज्यादातर बसें रोडवेज की डिपो और वर्कशाप में बिना ड्राइवर और कंडक्टरों के धूल फांक रही है। हैरानी की बात यह है कि साल दर साल पंजाब रोडवेज का बस फ्लीट लगातार कम होता जा रहा है। साल 2000 से पहले पंजाब रोडवेज के पास कुल 2407 बसों का फ्लीट हुआ करता था। पंजाब रोडवेज के जालंधर डिपो-1 के पास करीब 130 परमिट और 104 बसें होनी चाहिए लेकिन 88 है। जालंधर डिपो-2 के पास भी 145 के करीब परमिट है लेकिन बसों की संख्या महज 75 है। ^ सरकार पिछले डेढ़ साल से नई बसों को शामिल नहीं कर पाई। रोडवेज के पास बसें लगातार कम होती जा रही है। सड़कों पर कुल बसों में से भी सिर्फ 850 से 900 के करीब ही चल रही है क्योंकि ड्राइवर और कंडक्टरों की भी कमी है। साल दर साल बसें कंडम हो रही है। हर डिपो के पास 75 से 85 बसों का फ्लीट रह गया है उनमें से भी 50 से 60 ही चल रही है। -चानण सिंह , रोडवेज, पनबस व पीआरटीसी यूनियन नेता। सरकार व यूनियन आमने-सामने, फायदा प्राइवेट ऑपरेटरों को पिछले करीब 2 साल से दर्जनों बार रोडवेज में किलोमीटर स्कीम के तहत बसों को शामिल करने का टेंडर रद्द करते हुए उसे आगे बढ़ाया जा रहा है। पंजाब रोडवेज की यूनियन विरोध कर रही है कि सरकार किलोमीटर स्कीम से प्राइवेट ऑपरेटरों को फायदा पहुंचा रही है, जबकि सरकार उसे अपने हित में बता रही है। इस लड़ाई के चलते दो सालों से रोडवेज में नई बसें शामिल नहीं हो रही, जिससे रोडवेज को आर्थिक और यात्रियों को भी सीधा सुविधा न होने का नुकसान हो रहा है। हालांकि यूनियन सरकार पर भी पंजाब रोडवेज को जानबूझकर कमजोर करने का कई बार गंभीर आरोप तक लगा चुकी है। सरकार और यूनियन के झगड़े में कई बार बसों का चक्का जाम तक हो चुका है जिसका फायदा प्राइवेट ऑपरेटरों को होता है। जल्द नई बसें शामिल होंगी, नए मुलाजिमों की भर्ती होगी ^रोडवेज में नई बसों को शामिल करने की प्रक्रिया चल रही है जल्द नई बसें शामिल होंगी। इसके अलावा मुलाजिमों की कमी को पूरा करने के लिए भी मुलाजिमों की भर्ती होगी। सभी कार्यों को लेकर जल्द टेंडर का प्रोसेस पूरा होगा। – जसबीर कोटला, डिप्टी डायरेक्टर।

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