श्रुति मंडल और कला, साहित्य एवं संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित दो दिवसीय सुराणा स्मृति समारोह का समापन संगीत की सुरमई शाम के साथ हुआ। समारोह के अंतिम दिन देश के सुप्रसिद्ध सरोद वादक पंडित तेजेंद्र नारायण मजूमदार ने अपनी जादुई प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। सर्द मौसम में उनकी स्वरलहरियों ने जैसे गर्माहट भर दी। पंडित तेजेंद्र नारायण मजूमदार ने अपनी प्रस्तुति को उस्ताद जाकिर हुसैन को समर्पित करते हुए राग यमन कल्याण से शुरुआत की। उन्होंने आलाप, जोड़, झाला, और द्रुत लय में सरोद की मधुर धुनों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। समापन में उन्होंने राग श्याम कल्याण की प्रस्तुति दी, जिसने कार्यक्रम में एक अद्भुत सांगीतिक समापन की छटा बिखेरी। पंडित मजूमदार के साथ तबले पर प्रसिद्ध वादक पंडित विक्रम घोष ने संगत की। उनके तबले की लयकारी और उंगलियों का जादू इतना प्रभावशाली था कि दर्शकों की वाह-वाह के स्वर थमने का नाम नहीं ले रहे थे। स्मृति दिवस और छात्रवृत्ति सम्मानसमारोह का दूसरा दिन पद्मश्री प्रकाश चंद्र सुराणा स्मृति दिवस के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर श्रुति मंडल की ओर से हर साल दी जाने वाली ₹51,000 की छात्रवृत्ति इस बार कोलकाता के युवा कलाकार रुद्राशीष घोष को प्रदान की गई। कार्यक्रम की शुरुआत में पद्मश्री प्रकाश चंद्र सुराणा को पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद अरतिका सुराणा और अलीना सुराणा ने तिलक लगाकर कलाकारों का अभिनंदन किया।


