पटियाला के भाइयों का कमाल-अमरूद में ली दोगुनी आमदनी:बंटवारे में पाकिस्तान से आकर की गेहूं-धान की खेती; अब 25 एकड़ में बागवानी

विटामिन सी, विटामिन बी, कैल्शियम, आयरन, फास्फोरस समेत कई पौष्टिक तत्वों से भरपूर अमरूद एक अच्छा एंटीऑक्सिडेंट है। इस फल की खेती पटियाला जिले में करीब 1100 हेक्टेयर में की जा रही है। गेहूं-धान के चक्र से बाहर निकलकर झिल गांव के किसान भाई मालविंदर सिंह माली और रविंदर सिंह बिट्टू 25 एकड़ में अमरूद की सफल खेती कर रहे हैं। देश में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और दुनिया में इंडोनेशिया, चीन और पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर इसकी खेती की जाती है। दोनों भाइयों के पास कुल 60 एकड़ जमीन है। इकट्‌ठे रहते हैं। संयुक्त परिवार के 11 सदस्य हैं। दोनों भाइयों का कहना है कि गेहूं-धान की खेती से वे 40-50 हजार रुपए प्रति एकड़ कमाते थे, अब अमरूद से प्रति एकड़ एक लाख रुपए का फायदा हो रहा है। बंटवारे के दौरान पाकिस्तान से आया बड़े भाई रविंदर सिंह के अनुसार, उनका परिवार वर्ष 1947 में मुल्क के बंटवारे के दौरान पाकिस्तान से आया था। बुजुर्ग वहां अमरूदों की खेती करते थे, सो यहां आकर 25 एकड़ में गेहूं-धान की खेती करने लगे। कुछ सालों से सूबे में लगातार गिर रहे भूजल स्तर और बड़े ट्यूबवेल पर अधिक खर्च (ढाई से तीन लाख रुपए) देख अमरूद की खेती करने का फैसला किया। उन्होंने हेक्टेयर के हिसाब से 15 हजार पौधे लगाने को खेतीबाड़ी विभाग से सब्सिडी पर पौधे लिए और भादसों रोड एवं संगरूर रोड स्थित भेड़पुर गांव में अपनी जमीन पर लगाकर अमरूद की खेती की शुरुआत की। दो साल तक पौधा बड़ा हुआ तो कोई आमदनी नहीं हुई। तीसरे साल तो कमाल हो गया। धान-गेहूं से दोगुनी आमदनी हुई। एक साल में दो से तीन बार फसल अमरूद एकमात्र ऐसा फल है, जो एक साल में 2-3 फसल देता है यानी 2-3 गुना आमदनी बढ़ी। एक फसल मर जाए तो दूसरी भरपाई कर देती है। मालविंदर के मुताबिक, इससे गेहूं-धान से डेढ़ से 2 गुना ज्यादा आमदनी होती है। जब पौधे छोटे होते हैं, तब सरसों व अन्य सब्जियां लगाकर अतिरिक्त आमदनी भी होती है। 4 किस्म के अमरूद की खेती रविंदर ने बताया कि वे 4 किस्म के अमरूद हिसार सफेदा, इलाहाबादी सफेदा, श्वेता और पंजाब सफेदा की खेती करते हैं। पहले तो अमरूद बेचने खुद पटियाला-चंडीगढ़ की मंडियों में जाना पड़ा। अब वे खड़ी फसल बेच देते हैं। उन्हें मंडियों में नहीं जाना पड़ता। आढ़ती खुद उनके पास आ जाते हैं। बोले- किसानों को गेहूं-धान से बाहर निकलना चाहिए दोनों भाइयों का कहना है कि किसानों को गेहूं-धान से बाहर निकलना चाहिए। बागबानी अच्छा विकल्प है। इससे आमदनी बढ़ती है और पानी की खपत कम होने से भूजल संरक्षण भी भरपूर होता है। पंजाब जैसे सूबे के लिए तो यह बहुत जरूरी है, जहां भूजल स्तर लगातार गिर रहा है। उन्होंने सुझाव दिया यदि कोई किसान अमरूद का बाग लगाना चाहता है तो वह थोड़ी जमीन से शुरुआत करे। जो पौधा तंदरुस्त है उसके साथ और पौधे लगाएं। धीरे-धीरे गेहूं-धान छोड़कर अमरूदों की खेती बढ़ाएं।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *