पंजाब में पनबस और PRTC कर्मचारियों की यूनियनों ने सरकार को अल्टीमेटम दिया है। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं और जेल में बंद उनके नेताओं को रिहा नहीं किया गया, तो वे विभाग के अधिकारियों के घर-घर जाकर धरना- प्रदर्शन करेंगे। यह घोषणा हाल ही में हुई एक बैठक में की गई, जिसमें CITU के राज्य महासचिव महान सिंह रोड़ी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। बैठक में यूनियन के संरक्षक कमल कुमार, चेयरमैन बलविंदर सिंह राठ और राज्य अध्यक्ष रेशम सिंह ने सरकार पर आरोप लगाया कि, सरकार विभाग का निजीकरण कर कॉर्पोरेट घरानों को लाभ पहुंचाना चाहती है। उन्होंने बताया कि सरकार लगातार किलोमीटर स्कीम के लिए टेंडर जारी कर रही है, जिसका संगठन विरोध कर रहा है। यूनियनों ने इस स्कीम को घाटे का सौदा साबित करने के लिए सबूत भी पेश किए, लेकिन उनका दावा है कि सरकार इन सबूतों को नजरअंदाज कर निजीकरण की ओर बढ़ रही है। यूनियन नेताओं ने बताया कि उनके कई साथी, जो सरकारी संस्थान में काम कर रहे थे, उन्हें गैर-कानूनी आरोपों में जेल भेजा गया है। राज्य कोषाध्यक्ष बलजीत सिंह, रमनदीप सिंह और वरिष्ठ उपाध्यक्ष गुरप्रीत सिंह पन्नू ने कहा कि उनके साथियों को जेल में बंद हुए लगभग 58 दिन हो गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बार-बार बातचीत का नाटक कर रही है और समय बर्बाद कर रही है। निजीकरण को बढ़ावा दे रही पंजाब सरकार : यूनियन नेता यूनियन का कहना है कि एक स्वतंत्र देश में सभी को अपनी आवाज उठाने का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन सरकार कर्मचारियों के इस अधिकार को छीन रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ठेकेदार सिस्टम के माध्यम से कर्मचारियों का शोषण कर रही है और मांगों का समाधान करने के बजाय निजीकरण को बढ़ावा दे रही है। यूनियन ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह आम जनता के लिए लड़ने वाले कर्मचारियों पर मामले दर्ज कर उन्हें जेल भेज रही है, जिससे यह साबित होता है कि यह सरकार भी कॉर्पोरेट घरानों के हित में काम कर रही है। इस विरोध में, यूनियन ने 2 जनवरी को सभी डिपो के गेट पर गेट रैली करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि 26 जनवरी को भारत में संविधान लागू हुआ था, और सरकार उस संविधान की भावना का उल्लंघन कर रही है।


