स्वायत्त शासन विभाग ने नगरीय निकायों में लंबित प्रकरणों के त्वरित निस्तारण के लिए प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव किया है। नए आदेशों के तहत, अब पट्टे और लीज डीड आयुक्त या अधिशाषी अधिकारी (ईओ) के एकल हस्ताक्षर से ही जारी किए जाएंगे। इस कदम से लंबे समय से अटकी फाइलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है। कई महीनों तक नहीं मिली स्वीकृति
कोटपूतली नगर परिषद क्षेत्र में सभापति का कार्यकाल पूरा होने के बाद निर्वाचित बोर्ड का गठन नहीं हो सका था। इसके कारण लीज डीड, भूखंड आवंटन और पट्टों से जुड़ी सैकड़ों फाइलें महीनों से स्वीकृति का इंतजार कर रही थीं। नागरिकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे थे, जिससे उनमें असंतोष बढ़ रहा था। अधिकांश पत्रावलियां प्रशासक के समक्ष प्रस्तुत की जा रही थीं, लेकिन हस्ताक्षर में देरी और प्रशासनिक व्यस्तता के कारण उनका निस्तारण नहीं हो पा रहा था। कई मामले ऐसे भी थे जिनमें राजकाज पोर्टल पर अपलोड होने के बावजूद महीनों तक स्वीकृति नहीं मिल सकी थी। आवेदकों के समय की होगी बचत
नए आदेशों में स्पष्ट किया गया है कि केवल वे ही मामले प्रशासक के समक्ष रखे जाएंगे, जिनमें बोर्ड के निर्णय की आवश्यकता हो। सामान्य लीज डीड और पट्टा संबंधी प्रकरणों का अनुमोदन अब आयुक्त या ईओ स्तर से ही किया जाएगा। इस व्यवस्था से प्रक्रिया सरल होगी और आवेदकों के समय की बचत होगी। अधिकारी स्तर पर ही निपटाया जाएगा प्रकरण
नगर परिषद प्रशासन ने पुराने और लंबित प्रकरणों की सूची तैयार कर प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण की कवायद शुरू कर दी है। नगर परिषद आयुक्त नूर मोहम्मद ने बताया कि विभागीय आदेशों के अनुरूप अब सामान्य लीज डीड और पट्टा प्रकरणों को अधिकारी स्तर पर ही निपटाया जाएगा। उन्होंने आश्वस्त किया कि फाइलों को अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखा जाएगा और सभी लंबित मामलों का प्राथमिकता से निस्तारण किया जा रहा है, ताकि आमजन को समय पर दस्तावेज मिल सकें।


