पठानकोट-जोगिंदरनगर रेल सेक्शन बहाल:10 दिन बाद दौड़ेंगी ट्रेनें, बारिश-भूस्खलन के चलते बंद थीं, कांगड़ा घाटी रेलमार्ग संचालन के लिए ‘फिट’ घोषित

हिमाचल प्रदेश की हसीन वादियों की लाइफलाइन कही जाने वाली ऐतिहासिक कांगड़ा घाटी नैरोगेज रेल सेवा के यात्रियों के लिए बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। पिछले करीब दस दिनों से लगातार भारी बारिश और भूस्खलन के कारण थमी हुई ट्रेनों की आवाजाही एक बार फिर पटरी पर लौट गई है। रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग ने पूरे ट्रैक का गहन निरीक्षण, सुरक्षा परीक्षण और मरम्मत कार्य पूरा करने के बाद इसे ट्रेनों के संचालन के लिए पूरी तरह सुरक्षित (फिट) घोषित कर दिया है। जिसके बाद शुक्रवार की सुबह 5 बजे पहली ट्रेन को पठानकोट से जोगिंदरनगर के लिए रवाना किया गया। अब सारा दारोमदार मौसम के मिजाज पर टिका है। यदि मौसम सामान्य रहा, तो पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेलखंड पर रेल सेवा जारी रहेगी। बता दें, कांगड़ा घाटी नैरोगेज रेल सेवा न केवल परिवहन का सबसे सस्ता और सुगम माध्यम है, बल्कि यह क्षेत्र के पर्यटन उद्योग की रीढ़ भी है। इसके दोबारा शुरू होने से जहां एक ओर आम जनजीवन पटरी पर लौटेगा, वहीं स्थानीय व्यापार और पर्यटन गतिविधियों में भी दोबारा रौनक देखने को मिलेगी। 21 जुलाई से सुरक्षा के लिहाज से बंद था ऐतिहासिक रेलमार्ग
गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में बीते दिनों हुई भीषण बारिश, जगह-जगह चट्टानें खिसकने और ट्रैक पर मलबा आने के कारण 21 जुलाई को रेलवे प्रशासन ने एहतियातन इस पूरे मार्ग पर ट्रेनों का आवागमन रोक दिया था। यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए उत्तर रेलवे ने आपातकालीन कदम उठाते हुए रेल सेवाओं को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया था। इसके बाद से ही इंजीनियरिंग टीमें दिन-रात ट्रैक की मरम्मत और मलबे को हटाने के काम में जुटी हुई थीं। बस किराए की मार: 5 गुना अधिक खर्च करने को मजबूर थे यात्री पिछले दस दिनों से कांगड़ा घाटी रेल सेवा बंद होने के कारण आम जनता को भारी वित्तीय और मानसिक परेशानी झेलनी पड़ रही थी: यात्रियों की मुसीबत: रोजाना दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों, स्कूल-कॉलेज के छात्रों, स्थानीय दुकानदारों और घूमना पसंद करने वाले पर्यटकों का संपर्क एक तरह से कट सा गया था। महंगा हुआ सफर: ट्रेनें ठप्प होने के चलते लोगों को मजबूरी में निजी गाड़ियों या बसों से यात्रा करनी पड़ रही थी। बस का किराया रेल किराए की तुलना में लगभग पांच गुना (5X) अधिक होने के कारण आम आदमी की जेब पर भारी बोझ पड़ रहा था। इसके अलावा सड़कों पर ट्रैफ़िक के कारण समय भी ज्यादा लग रहा था। शुरुआती चरण में चलेंगी 2 जोड़ी ट्रेनें, चरणबद्ध तरीके से बहाल होगा नेटवर्क रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यदि सब कुछ योजना के मुताबिक रहा और मौसम ने साथ दिया, तो शुरुआती चरण में सीमित संचालन शुरू किया जाएगा: सुबह की ट्रेनें पहले चलेंगी: शुरुआत में केवल सुबह 5 बजे और सुबह 7 बजे प्रस्थान करने वाली दो जोड़ी नैरोगेज ट्रेनें ही चलाई जाएगी। निरंतर निगरानी: इन ट्रेनों के सफल संचालन और ट्रैक की स्थिरता का लगातार मूल्यांकन (Assessment) किया जाएगा। पूर्ण बहाली: यदि स्थितियां पूरी तरह अनुकूल रहीं और दोबारा भूस्खलन की घटना नहीं हुई, तो बाकी सभी ट्रेनों को भी चरणबद्ध तरीके से पटरी पर उतार दिया जाएगा। पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई रफ्तार रेल ट्रैक के फिट घोषित होने और ट्रेनों की संभावित बहाली की खबर से कांगड़ा घाटी के स्थानीय निवासियों, कारोबारियों और पर्यटकों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। फिरोजपुर रेल डिवीजन के वरिष्ठ रेल अधिकारी ने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा रेलवे की पहली प्राथमिकता है। इंजीनियरिंग विंग ने निरीक्षण कर ट्रैक को सुरक्षित घोषित कर दिया है। यदि मौसम का मिजाज अनुकूल रहता है और कोई नया भूस्खलन नहीं होता, तो रेल सेवाएं जारी रहेंगी। हम पूरे रूट पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

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