जोधपुर फलोदी जिले की रहने वाली खुशबू चारण का असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए चयन हुआ है। इस सफलता को हासिल करने में कई बाधा इनके सामने आई। लोगों ने विधवा कोटे का सहारा लेकर नौकरी प्राप्त करने पर भी सवाल उठाए। खुशबू ने इसे चैलेंज की तरह लिया और विधवा कोटे के बजाय सामान्य श्रेणी में सिलेक्शन होकर असिस्टेंट प्रोफेसर बनी। खुशबू (33) ने बताया- उनका जन्म 3 दिसंबर 1991 को हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा उनके गांव नोखड़ा चारणान में हुई। उस समय बीएसटीसी की थी। इसके बाद जैसलमेर के पोकरण के पास बारहठ का गांव में नरेंद्र सिंह के साथ 19 साल की उम्र में 6 फरवरी 2010 को शादी हो गई। उस समय BSTC की पढ़ाई चल रही थी। 9 जून 2011 को बेटे मयंक का जन्म हुआ। 18 सितंबर 2012 को सड़क हादसे में पति की मौत हो गई। परिवार के सहयोग से पढ़ाई शुरू की
मैं टूट चुकी थी। तब मेरे ससुर विजयदानजी (रिटायर टीचर) ने हिम्मत बंधाई। तब मैंने फैसला लिया कि जिस प्रकार से मीराबाई ने सांवरे को चुना था। मैं भी अपने लिए शिक्षा को चुनकर आगे बढूंगी। इसके बाद 2015 से अपनी पढ़ाई करना शुरू कर दिया। इसमें मेरे काकोसा दिनेश चारण जो मंडोर पंचायत समिति में अतिरिक्त विकास अधिकारी है उन्होंने भी मोटिवेट किया। पिछली बार की वैकेंसी में इंटरव्यू में सफल नहीं हुई। इस बार असिस्टेंट प्रोफेसर के इंटरव्यू को पास कर यह गौरव हासिल किया। लोग कहते थे, इतना पढ़-लिखकर क्या करूंगी पढ़ाई शुरू की तो कुछ लोगों ने तंज भी कसा। कहा कि इतना पढ़-लिखकर क्या करना है। जब नौकरी पहले से ही लग चुकी है। मैंने कहा कि मेरा चयन सामान्य श्रेणी में होना चाहिए क्योंकि समाज में कई लोग ऐसे भी होते हैं जिनकी सोच होती है कि विधवा कोटा से आरक्षण के चलते नौकरी पा ली। मैं उन सब लोगों को जवाब देना चाहती थी। इसके अलावा मैं स्कूल में व्याख्याता थी तो मेरी पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों को सिलेबस भी पूरा करवाना था। यह सारे चैलेंज मेरे जीवन में आए। कई लोग मेरे ससुराल में भी कहते थे कि बहू को इतना पढ़ाई-लिखाई करवाकर क्या करोगे। अब नौकरी लग चुकी है गुजारा चल जाएगा लेकिन मेरी बात केवल मेरे गुजारे तक ही सीमित नहीं है। मैं लोगों को संदेश देना चाहती हूं कि किसी कारणवश यदि इस प्रकार की विपरीत परिस्थितियां आ जाए। यदि आपका अध्ययन छूट जाए तो आपको पुनः पढ़ना चाहिए और अपने पैरों पर खड़े होना चाहिए। मैं खाना बनाते हुए भी यूट्यूब में पढ़ाई के वीडियो देखती थी। अब मेरा चयन विधवा कोटे के बजाय सामान्य श्रेणी में 151वीं रैंक के साथ चयन हुआ है। 2017 में तृतीय श्रेणी शिक्षक में हुआ था चयन खुशबू ने बताया- साल 2011 में BSTC शहर के प्राइवेट कॉलेज से पूरी की। पति की मौत के 4 साल बाद 2015 में JNVU जोधपुर से BA में स्नातक किया। इसके साथ साथ ही कंपीटिशन एग्जाम की तैयारियां शुरू की। इसके साल 2017 में तृतीय श्रेणी शिक्षक के रूप में चयन हुआ। पहली पोस्टिंग राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय मेड़वा ब्लॉक पोकरण में हुई। जो ससुराल से पांच किमी की दूरी पर था। यहां पर बच्चों को पढ़ने के साथी अपनी तैयारी भी जारी रखी और 2018 में द्वितीय श्रेणी अध्यापक के तौर पर चयन हुआ। इसमें पोस्टिंग ससुराल से 150 किमी दूर जैसलमेर जिले के देतीना में हुई। उस समय बच्चा छोटा होने और सास-ससुर वृद्ध होने की वजह से उन्होंने ज्वाइन नहीं किया। 2019 में JNVU से प्राइवेट M.A हिंदी पूरा किया। इसी साल UGC नेट भी क्लियर किया। 2020 में प्रथम श्रेणी अध्यापक हिन्दी के तौर पर राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय देचू में चयन हुआ। तब ससुराल से रोजाना 100 किलोमीटर बस से स्कूल आती थी। आने जाने में 200 किमी का सफर हो जाता था। 2021 में असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए इंटरव्यू कॉल हुआ, लेकिन इंटरव्यू में सफल नहीं हुई। 2022 में जनार्दन रॉय यूनिवर्सिटी उदयपुर से PHD के एंट्रेंस एग्जाम में सफल हुई। 2023 में RPSC की और से असिस्टेंट प्रोफेसर के एग्जाम हुए। जिसमें 17 दिसंबर को फाइनल परिणाम में जनरल कैटेगरी में 151वी रैंक के साथ चयन हुआ। अब जल्द काउंसलिंग के बाद पोस्टिंग मिलेगी। वर्तमान में खुशबू की उदयपुर से PHD भी चल रही है। जिसमें लेखिका मनीषा कुलश्रेष्ठ के काव्य स्त्री संवेदना पर रिसर्च कर रही है। जिसमें एक स्त्री, परिवार, समाज के लिए कितनी संवेदनशील है इस पर रिसर्च कर रही हैं। खुशबू की सास सुगन कंवर गृहणी है। तीन ननद है,जिनकी शादी हो चुकी हैं। पति अकेले बेटे थे। खुशबू ने बताया पीहर में उनके एक भाई जयंत चारण 2023 बेच के IAS है। जो असम के जोरहाट में एडिशनल कमिश्नर है। दूसरा भाई विक्रम सिंह ने हाल ही में UGC नेट क्लियर किया है। मेरे पिता जयप्रकाश चारण गांव के पास स्कूल में व्याख्याता हैं। जबकि एक बहन की शादी हो रखी है।


