पथ संचलन आज…:हर घर को जोड़ा, डेढ़ लाख स्वयंसेवक होंगे शामिल, 34 संचलन तय करेंगे 170 किमी की दूरी

संघ के 100 वर्ष… डॉ. हेडगेवार ने ही रोपा था इंदौर में संघ का बीज रविवार को शहर में संघ के पथ संचलन का उत्सव रहेगा। शताब्दी वर्ष के इस आयोजन के लिए संघ की मोहल्ला रणनीति से तैयारियां की गई हैं। पूरे शहर के हर हिस्से में स्वयंसेवकों की कदमताल और घोष वाद्य से समरसता संगीत की गूंज रहेगी। संघ ने 100 वर्ष में स्वयंसेवकों की कदमताल को समाज के साथ मिलाने का प्रयास किया और इंदौर में संघ सामाजिक जनभागीदारी की पहचान बन गया है। इसकी शुरुआत मध्य शहर से हुई थी। शहर के पहले संघचालक भाई कोतवाल कांग्रेस कार्यकर्ता थे। शताब्दी वर्ष में रविवार को शहर में 34 स्थानों से संचलन निकलेंगे। इस बार हर घर से कम से कम एक स्वयंसेवक इसमें शामिल होगा। ये संचलन कुल 170 किमी की दूरी तय करेंगे। इतिहास की बात करें तो इंदौर में संघ कार्य का बीजारोपण संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने किया था। बात 1929 की है। डॉ. हेडगेवार अपनी चाची के इलाज के लिए देवास आते थे। तब वे इंदौर व देवास दोनों स्थान पर प्रवास करते थे। मध्य भारत की संघगाथा में इसका उल्लेख मिलता है। इसमें तात्या सरवटे जो बाद में संघचालक बने, बताते थे- मेरे घर पर शहर के अलग-अलग तबके के लोग बैठते थे। इसमें भाई कोतवाल, विनायक राव घारपुरे, गणेश वासुदेव ओक, कृष्णराव ओक, बांबोरीकर मास्टर व नाना साहेब चिटनिस आदि रहते थे। डॉ. हेडगेवार हमारे बीच आते और चर्चा करते थे। एक दिन चर्चा में विषय आया, आजकल के तरुण तेजहीन हो गए हैं। इसके लिए कुछ करना चाहिए। डॉ. हेडगेवार ने इस मौके को देखा और अपनी योजना सभी के समक्ष रखते हुए कहा, आप लोग भी संघ कार्य की शुरुआत करें। इस पर शाखा शुरू करने का संकल्प लिया और कांग्रेस कार्यकर्ता भाई कोतवाल को संघचालक बनाया गया। 1940 के बाद तेजी से बढ़ते गए संघ के गढ़ रामबाग बना गतिविधि केंद्र
विष्णु रामचंद्र भिडे एक पेंटर थे पर पहलवानी का शौक था। उन्होंने पुरुषोत्तम किबे के प्लॉट पर भारत वीर संघ अखाड़ा शुरू किया। इसके बारे में सुनकर डॉ. हेडगेवार वहां पहुंचे। उद्बोधन में युवाओं से कहा, आदर्श प्रस्तुत करना है। दो साल बाद यह राम सेवक संघ में विलीन हो गया। यहां धीरे-धीरे रामबाग शाखा लगने लगी। बाद में यहां अर्चना कार्यालय बना। 1936 के बाद संघ कार्य का विस्तार हुआ। गणेश विद्या मंदिर सभाग्रह में संघ की बैठकें व बौद्धिक होते थे। 1940 के बाद स्नेहलतागंज, रामबाग, न्यायमंदिर, छावनी, मल्हारगंज, पलसीकर कॉलोनी संघ के गढ़ बनते गए। गुरुजी ने कहा, पितृवत स्नेह रहे
संघ के सरसंघचालक गुरुजी का नाता भी मालवा निमाड़ से रहा है। उनके देशव्यापी प्रवास के दौरान महू स्टेशन पर स्वागत किया था। मुख्य कार्यक्रम पोलोग्राउंड में था। इसके लिए अनुमति नहीं मिल रही थी। तब तत्कालीन संघ चालक नानू भैया पंतवैद्य व श्रवणे मास्टर ने प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को तार भेज कर सहायता मांगी थी। वहां से तत्काल जवाब आया और मैदान मिल गया। इंदौर पर गुरुजी का विशेष स्नेह रहता था। एक प्रवास के दौरान जब सेठ हुकमचंद उनसे मिलने पहुंचे। वार्तालाप में उन्होंने संघ को सहायता की इच्छा व्यक्त की तो गुरुजी ने कहा, आपका पितृवत स्नेह बना रहे। पहली घोष शाखा इंदौर में बनी
प्रांत में इंदौर की घोष शाखा ही पहली शाखा बनी थी। अण्णा रोडे वर्धा से इंदौर आए थे। वे घोष के अच्छे जानकार थे। उन्होंने स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित किया। इसमें दिनकरराव खाम्बेटे, विष्णु खाम्बेटे व मनोहर मोघे ने प्रशिक्षण लिया। उस समय पथ संचलन या उत्सव के समय घोष की जरूरत महसूस होती थी। संघ के पास दो आनक, एक पणव व दो शंख होते थे। उत्सव के मौके पर दिनकरराव खाम्बेटे से सहयोग लेते थे। वे अपने सिख बैंड मास्टर से वाद्य यंत्र ले आते थे। इस तरह अभावों के साथ आगे बढ़ते गए। आज इंदौर के पास एक समृद्ध घोष है। व्यवस्था में सबसे पुराना विभाग
संघ व्यवस्था में इंदौर सबसे पुराना विभाग है। वर्तमान में धार, देवास व झाबुआ जिले के साथ काम कर रहा है। पहले प्रचारक जुगलकिशोर परमार थे। इसके बाद सूची बनती गई। नाना केलकर सरकारी नौकरी छोड़कर प्रचारक बने थे। इंदौर ने अनेक कार्यकर्ता दिए। वर्तमान में भैया जी जोशी अखिल भारतीय स्तर पर कार्यरत हैं। संघ कार्यकर्ताओं ने शिक्षा के लिए यहां स्कूल भी शुरू किया था, जो बाद में बंद हो गया। कालांतर में फिर यह व्यवस्था बनी। संघ विचारधारा से प्रेरित स्कूल बने। पिछले साल ही इंदौर में देश का सबसे बड़ा आयोजन किया गया था। बड़े आयोजनों की परंपरा दी इंदौर ने सभी सरसंघचालकों का सान्निध्य मिला : सोहनी पूर्व क्षेत्र संघचालक रहे अशोक सोहनी का कहना है, इंदौर मध्य प्रांत में संघ की गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। यहां सभी सर संघचालकों का सान्निध्य मिला। शताब्दी वर्ष में पथ संचलन व्यापक स्तर पर निकल रहे हैं, जिससे सामाजिक जागरण में मदद मिलेगी। युवाओं के बीच संघ की बातों को रखा जा सकेगा।

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