पन्ना टाइगर रिजर्व के घने जंगलों के बीच स्थित ‘झालरिया महादेव’ मंदिर के द्वार गुरुवार को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। साल में सिर्फ एक बार खुलने वाले इस गुफा मंदिर के दर्शन के लिए आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। हजारों भक्तों ने इस रहस्यमयी स्थान पर पहुंचकर शिवलिंग के दर्शन किए, जहां कुदरती जलधाराएं खुद-ब-खुद महादेव का अभिषेक करती हैं। आठ दिनों के अनुष्ठान के बाद हुआ भंडारा झालरिया महादेव मंदिर टाइगर रिजर्व के ‘कोर क्षेत्र’ यानी सबसे सुरक्षित और दुर्गम हिस्से में आता है, जहां साल भर इंसानों का जाना मना है। बसंत पंचमी से यहां आठ दिनों की श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया गया था। गुरुवार को विशाल भंडारे के साथ इस धार्मिक अनुष्ठान का समापन हुआ और मंदिर के पट आम जनता के लिए खोल दिए गए। लोग बोले- दर्शन मात्र से दुख दूर होते है दर्शन के लिए पहुंचे अक्षय तिवारी और धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि यह स्थान बेहद अलौकिक है। गुफा के भीतर साल भर बहने वाली प्राकृतिक जलधारा यहां की दिव्यता का प्रमाण है। मान्यता है कि यहां दर्शन मात्र से जीवन के सभी दुख दूर हो जाते हैं। सुबह से ही मंदिर मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं, जिसमें बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में भारी उत्साह देखा गया। बाघों का दीदार और सख्त सुरक्षा इंतजाम टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने इस मौके पर भक्तों को निःशुल्क प्रवेश की अनुमति दी थी। चूंकि रास्ता पथरीला और खतरनाक है, इसलिए सुरक्षा के लिहाज से केवल बड़ी गाड़ियों (SUV) को ही अंदर जाने दिया गया, छोटे वाहनों पर रोक रही। खास बात यह रही कि मंदिर जाते समय कई श्रद्धालुओं को बाघ और अन्य वन्यजीवों के दर्शन भी हुए, जिससे उनकी यात्रा और भी रोमांचक हो गई। पुलिस प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पूरे रास्ते कड़ी निगरानी रखी।


