पन्ना में सदियों पुरानी परंपरा निभाई:महाराजा छत्रसाल के वंशज को दिव्य तलवार, पान व बीरा भेंट

पन्ना के प्राचीन खेजड़ा मंदिर में सदियों पुरानी परंपरा का गुरुवार को विधिवत निर्वहन किया गया। इस अवसर पर महाराजा छत्रसाल के वंशज पन्ना नरेश छत्रसाल द्वितीय को मंदिर के पुजारी द्वारा दिव्य तलवार, पान और बीरा भेंट किया गया। कार्यक्रम में धर्मगुरु डॉ. दिनेश एम पंडित, धर्मोपदेशक पंडित खेमराज और श्याम बिहारी दुबे सहित श्री 108 प्राणनाथ मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारी व प्रबंधक उपस्थित रहे। सैकड़ों की संख्या में महामति के अनुयायी श्रद्धालु दशहरा के दिन इस समारोह के साक्षी बनने के लिए मंदिर प्रांगण में इकट्‌ठा हुए। मान्यता है कि लगभग 400 वर्ष पूर्व महामति प्राणनाथ ने महाराजा छत्रसाल को दिव्य तलवार और बीरा भेंट कर विजय का आशीर्वाद दिया था। इसी आशीर्वाद और तलवार के बल पर महाराजा छत्रसाल ने मुगलों के खिलाफ ऐतिहासिक 52 लड़ाइयां जीती थीं। उसी परंपरा के निर्वहन में प्रतिवर्ष दशहरा के दिन महाराजा छत्रसाल के वंशजों को तलवार और बीरा भेंट किया जाता है। महामति प्राणनाथ ने बुंदेलखंड की रक्षा के लिए महाराजा छत्रसाल को यह वरदानी तलवार सौंपी थी और बीरा उठाकर संकल्प करवाया था। इस आशीर्वाद से महाराजा छत्रसाल पूरे बुंदेलखंड को जीतने में सफल रहे और अपना साम्राज्य स्थापित कर पन्ना को राजधानी बनाया, तभी से पन्ना में यह परंपरा निभाई जा रही है। विजयादशमी पर प्राणनाथ जी मंदिर के पुजारी महाराजा छत्रसाल के वंशजों का तिलक कर बीरा व तलवार भेंट करते हैं, जो देश और धर्म की रक्षा के लिए प्रदान की गई थी। देखिए तस्वीरें भजनों पर झूमे श्रोता महोत्सव के बीच जब महाराज छत्रसाल के वंशज व राजपरिवार के सदस्य पधारे तो सभा भवन प्राणनाथ की जय व बुन्देलखण्ड केशरी महाराजा छत्रसाल के जयकारों से गूंज उठा। इस अवसर पर श्री खेजड़ा मंदिर के विशाल चबूतरे में मंचीय कार्यक्रम का भी आयोजन हुआ, जिसमें धर्माचार्यों द्वारा महामति प्राणनाथ व महाराजा छत्रसाल के विषय में विस्तारपूर्वक बताया गया। वहीं सौरभ शर्मा व विजय शर्मा लल्लू द्वारा शानदार भजनों की प्रस्तुति दी गई। जिसमें उपस्थित लोग मग्न होकर झूमने लगे।

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